चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) विख्यात धर्म गुरु और दार्शनिक प्रवचन विशेषज्ञ डॉक्टर स्वामी युगल शरण महाराज ने अपने आध्यात्मिक प्रवचन में कहा कि ईश्वर इस संसार में सर्व-शक्तिमान और सर्वज्ञ हैं । भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए शरणागति आवश्यक हैं । शरणागति का अर्थ हैं -अपने आपको भगवान के चरणों में समर्पित कर देना ! ऋग्वेद में कृपा शब्द का उल्लेख 08 बार और शरणागति शब्द का उल्लेख 11 बार किया गया हैं ।
श्रद्धेय स्वामी जी ने यह भी कहा कि हम सब लोग बचपन में सरल थे जैसे-जैसे बड़े होते गए ईश्वर ने हमें सिखा दिया । हम सबको अब सरल बनना पड़ेगा । प्रवचन स्थल पर सलवा जुडूम पोर्टल न्यूज नेटवर्क पर भूपेंद्र देवांगन के निर्देश साहित्यकार शशिभूषण सोनी रिपोर्टिंग कर रहे हैं ।

*शरणागति के बाधक तत्व*
स्वामी जी ने कहा कि शरणागति में कुछ बाधक तत्व हैं । जैसे कि कपूयाचरण और तुष्टि । कपूयाचरण में जिन्हें भाव, अनृत भाव और माया भाव आते हैं । तुष्टि में शरणागति तुष्टि , काल तुष्टि और भाग्य तुष्टि आते हैं । स्वामी जी ने कहा कि यदि हमें ईश्वर की कृपा चाहिए तो हमें ईश्वर और गुरु की शरण में जाना होगा ।
उन्होंने विभीषण के वाक्यांश का उल्लेख करते हुए कहा कि ,विभीषण हमारी शरण में आया हैं और सुग्रीव तुम भी एक दिन मेरी शरण में आए थे । उन्होंने भगवान श्रीरामचन्द्र जी की ओर दृष्टांत देते हुए कहा कि अगर रावण भीमेरी शरण में आ जायेगा तो उन्हें भी मैं शरणागत दे दुंगा । सचमुच भगवान कितने कृपालु और दयालु हैं ।

*शरणागति की अवस्था क्या होनी चाहिए*
शरणागति शत-प्रतिशत होनी चाहिए । इसमें बाल भर का भी अंतर नहीं होनी चाहिए । जब सारे आश्रय छूट जाएं और हम व्याकुल होकर भगवान को आत्मीय रुप से पुकारे , यही शरणागति की अवस्था हैं , यह बातें खचा-खच भरे हुए प्रवचन पंडाल में स्वामी जी ने कही ।
*शरणागत जीव के लिए भगवान जरुरी*
डॉ स्वामी जी ने अनवरत व्याख्यान देते हुए कहा कि शरणागत जीव के लिए भगवान भी दयालु बन जाते हैं । वे शरणागत जीव के पिछले अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उनकी रक्षा करते हैं । भगवान शरणागत जीव का योगक्षेम वहन करते हैं ।

*जब हम कुछ नहीं करते हैं, तभी भगवान कृपा करते हैं*
महाभारत में वर्णित अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के कथन का विस्तार पूर्वक उल्लेख करते हुए कहा कि’ अरे श्रीकृष्ण तू तो द्वारिका गया था तो मुझे बुलाने क्यों आया । अगर युद्ध नहीं करेगा तो तुझे नर्क मिलेगा । क्षत्रिय का अर्थ ही होता हैं- धर्म का पालन करना ! अगर युद्ध नहीं करेगा तो आखिर क्या करेगा । स्वर्ग में वास्तविक सुख नही हैं , पुण्य के अनुसार ही स्वर्ग मिलेगा । उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि रसगुल्ला खाने के लिए भी मुंह चलाना पड़ता । कर्म हर किसी को करना पड़ता हैं ।स्वामी जी महाराज ने कहा कि धर्म और अधर्म दोनों को छोड़ दे और मेरी शरण में आजा। उन्होंने कहा कि पाप और पुण्य का फल देने वाला मैं ही हूं । शरणागति मतलब कुछ नहीं करना हैं, जब हम कुछ नहीं कर रहे हैं तब भगवान कृपा कर करते हैं ।
*आध्यात्मिक प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालु भक्त*
प्रवचन का रसपान करने के लिए स्थल पर पद्मेश शर्मा, सत्येंद्र सिंह, राजेश कुमार तिवारी,डॉ राम खिलावन यादव, संपादक जनादेश न्यूज, प्रिंट मीडिया से शशिभूषण सोनी , अर्जुन लाल सोनी , उपेंद्र धर दीवान, श्रीमति संतोषी सराफ , रमेश कुमार सोनी, श्रीमती शशिप्रभा सोनी, श्रीमति शांता-महेंद्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।


