बिलासपुर (सलवा जुडूम मीडिया) हमारे मीडिया से चर्चा करते हुए डॉ. राकेश राठौर ने बताया कि उन्हें वर्षों की निरंतर मेहनत, साहस और आत्मविश्वास का परिणाम के बाद यह उपलब्धि प्राप्त हुई है, सिर्फ एक डिग्री नहीं, बल्कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था, इतने कम आयु में राठौर जी को पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त होगी, इस सफ़र ने उन्हें सीखाया कि कठिनाइयाँ रास्ता रोकती नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को ऊँचा उठाती हैं, यह सफलता जीवन का दुसरा सुनहरा अध्याय में से एक है, जो हमेशा याद दिलाएगा कि सपने सच होते हैं, जब आप हार मानने से इनकार करते हैं।

डॉ राकेश राठौर ने कहा कि, इस उपलब्धि के मिलने पर पिता श्री रामेश्वर प्रसाद राठौर, माता श्रीमती शारदा राठौर एवं उनकी शोध निर्देशक डॉ.आँचल श्रीवास्तव जी और उन सभी लोगों का मै हृदय से आभारी रहूंगा, जिन्होंने हर कदम पर प्रोत्साहित किया। इसी के साथ एक सबसे अच्छा अनुभव तब हुआ जब पी.एच.डी. पूरी होने की खुशी तो उन्हें थी, पर असली खुशी का एहसास तब हुआ जब उन्हें उनके ही सहकर्मी ने पहली बार ‘डॉ. राकेश’ कहकर पुकारा। उसी आवाज़ में उनको सारी मेहनत की जीत सुनाई दी और आज खुद पर गर्व करने का यह क्षण हमेशा याद रहेगा, क्योंकि राकेश राठौर को “नाम के आगे ‘Dr.’ जोड़ने में चार साल लगे, पर गर्व उम्र भर रहेगा। अब आधिकारिक तौर पर—डॉ. राकेश राठौर को यह उपाधि सिर्फ नाम के आगे जुड़ा एक शब्द नहीं, बल्कि पिछले चार वर्षों की मेहनत, समर्पण और संघर्ष की प्रतिष्ठित पहचान बन चुकी है। इस पी एच डी की उपाधि प्राप्त होने पर, लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं एवं ढेर सारी बधाईया दी।


