चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) भक्ति करने वाले को भगवान को भगवान मानकर प्यार नहीं करना चाहिए बल्कि उनके मधुर रुप से प्यार करना चाहिए । भगवान का मधुर रुप बहुत ही आकर्षण और प्रेमपूर्ण होता हैं और भक्ति करने वाले को इसी रुप से प्यार करना चाहिए , उक्त उद्गार ब्रज किशोरी मिशन द्वारा आयोजित आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हुए डॉ स्वामी युगल शरण महराज ने कही । भगवत भजन के पश्चात डॉ स्वामी जी महराज का धारा प्रवाहिक प्रवचन चला ।

*आध्यात्मिक ज्ञान से पैदा होता हैं भक्ति-भाव*
आरती से पूर्व सोनू अग्रवाल कोरबा, दिनेश कुमार भिलाई, विनय उपाध्याय जांजगीर,विशाल धामेचा और शशिभूषण उपाध्याय को व्यासपीठ पर आमंत्रित कर स्वामी जी ने राधे-राधे दुपट्टा और कृपालु महाराज द्वारा रचित ग्रंथ भेंटकर आशीर्वाद दिया । इन लोगों ने भी माल्यार्पण व शाल भेंटकर स्वामी जी का सम्मान किया । लक्ष्मी ज्वेलर्स के संचालक सत्यनारायण ,जे के ज्वेलर्स के प्रोपराइटर राजकुमार और अधिवक्ता महावीर सोनी ने प्रिंट मीडिया के शशिभूषण सोनी तथा संपादक सलवा जुडूम न्यूज संपादक भूपेंद्र देवांगन से चर्चा करते हुए कहा कि डॉक्टर स्वामी जी से आशीर्वाद लेना हम सबके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात हैं और 19 दिनों से लगातार चल रहे आध्यात्मिक ज्ञान से भक्ति का भाव पैदा हो गया हैं ।

*भक्ति करने के लिए मोक्ष की कामना नहीं करनी चाहिए – स्वामी युगल शरण*
आध्यात्मिक प्रवचन के दौरान डॉ स्वामी युगल शरण महराज ने कहा कि प्रभु की भक्ति करने वाले से हम जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं और आत्मीक शांति प्राप्त कर सकते हैं । स्वामी जी ने भक्ति प्राप्ति करने की शर्तों पर खचा-खच भरे हुए पंडाल में प्रकाश डाला और बताया कि भक्ति को प्राप्त करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का श्रद्धालु भक्तों को ध्यान में रखना आवश्यक हैं । उन्होंने भक्ति की प्राप्ति की कुछ शर्तें बताई –

*भक्ति प्राप्त करने के लिए शर्तें**
मोक्ष पर्यन्त भी कामना ना करें* – भक्ति करने वाले को मोक्ष की कामना नहीं करनी चाहिए ।
*ब्रह्मलोक तक सुख की कामना ना करें* – भक्ति करने वाले को ब्रह्मलोक तक सुख की कामना नही करनी चाहिए ।
*भक्ति को कर्म और ज्ञान के आवरणों से अनाच्छन्न रखना* – भक्ति को कर्म और ज्ञान के आवरणों से मुक्त रखना चाहिए ।
*संसार नहीं मांगना* – भक्ति करने वाले को संसार की कामना नही करनी चाहिए ।
*अपने को जीव नहीं मानना* – भक्ति करने वाले को अपने को जीव नही मानना चाहिए बल्कि भगवान को अपना मानना चाहिए ।

*भगवान को भगवान मानकर प्यार नहीं करना चाहिए* – भक्ति करने वाले को भगवान को भगवान मानकर प्यार नही करना चाहिए बल्कि उनके मधुर रूप से प्यार करना चाहिए । भगवान का मधुर रुप से प्यार करने से कई लाभ होते हैं । इससे भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास बढ़ता हैं और वे भगवान के साथ एक गहरा संबंध स्थापित कर पाते हैं तथा मनुष्य जीवन धन्य हो जाता हैं ।
*पांच भावों से प्यार करना* – भक्ति करने वाले को भगवान के पांच भाव से प्यार करना चाहिए । ये भाव हैं शांत भाव , दास्य भाव , सख्य भाव,वात्सल्य भाव और माधुर्य भाव ।
*बड़ी संख्या में सहभागिता*
प्रवचन स्थल पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे नारायण प्रसाद चंदेल, पुलिस अधीक्षक विजय पाण्डेय, थाना प्रभारी जयप्रकाश गुप्ता , डॉ जी पी दुबे , पुरुषोत्तम शर्मा , शशिभूषण सोनी, रमेश कुमार , सत्येंद्र सिंह, श्रीमति शशिकांति , शशिप्रभा सोनी, राकेश शर्मा,ऋचा अग्रवाल, नेहा अग्रवाल, श्रीमति संगीता पाण्डेय,पद्मा शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल थे ।
*दो दर्जन से अधिक सेवादार*
पंडाल व्यवस्था प्रमुख गदाधर , गोपाल मंडल और विकास ने बताया कि डॉ स्वामी जी का प्रवचन श्रवण करने दूर-दूर से लोग आ रहे हैं । यहां पर दो-दर्जन से अधिक सेवादारों के अतिरिक्त स्थानीय नागरिक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं । प्रवचन का समापन 30 दिसंबर , 2025 को होगा । उन्होंने कहा कि भगवत भक्ति और प्रवचन सुनने से अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं ।


