चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) श्रीमद्भागवत गीता एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ हैं , जो न केवल हिंदू धर्म के लिए बल्कि समस्त मानव जाति के लिए महत्वपूर्ण हैं । इसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई हैं , जैसे कि कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष! गीता के श्लोक हमें जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं । उक्त उद्गार हजारी गली अम्बे रेसिडेंसी चांपा में सप्त-दिवसीय श्रीमद्भगवत गीता सार सुखद जीवन का आधार तथा गीता महोत्सव में राजयोगिनी तपस्विनी ब्रह्मा कुमारी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विदुषी शशिप्रभा दीदी जी ने कही । कथा का आयोजन धार्मिक आस्था रखने वाले लक्ष्मीचंद देवांगन और उनकी पत्नी श्रीमति उमा देवांगन द्वारा दिनांक 26 जनवरी 2026 को कलश यात्रा निकाल कर की गई । कलश यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल पहुंची, जहां पूजन उपरांत सायंकाल से कथा शुरू हुई और महाआरती के साथ समाप्त हुईं । कथा के प्रथम दिन सलवा जुडूम के संपादक भूपेंद्र देवांगन निर्देश पर लेखक शशिभूषण सोनी सहभागी बने ।

*गीता भगवान श्रीकृष्ण का गाया हुआ मधुर गीत*
कथा प्रसंग के दरमियान शशिप्रभा जी ने कहा कि गीता ही एक मात्र ऐसा शास्त्र हैं , जिसका सबसे अधिक अनुवाद विभिन्न भाषाओं में हुआ हैं । यह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का गया हुआ मधुर गीत हैं , बुद्धिमता की कुंजी हैं । कमजोर लोगों के लिए टॉनिक हैं । इसमें अपार संपत्तियां छिपी हुई हैं , इसमें आध्यात्मिक व खुशहाल जीवन जीने के रहस्य छिपे हुए हैं ।

*जीवन की चुनौतियों का सामना गीता से ही*
गीता में धर्म और अध्यात्म के अंतर को समझया गया हैं और सिखाया गया हैं कि कैसे अपने कर्तव्यों को निभाते हुए धर्म का पालन करना चाहिए ।

*आत्मा और शरीर का ज्ञान*
श्रीमद्भागवत गीता सिखाती हैं कि आत्मा अजर-अमर हैं जबकि मनुष्य का शरीर नाशवान हैं ।

*आत्मज्ञान और मोक्ष*
गीता में आत्मा का ज्ञान और मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया गया हैं । दीदी ने मीडिया से जुड़े हुए शशि भूषण सोनी से चर्चा करते हुए कहा कि गीता से हिंसा की प्रेरणा ना ले , इसमें मन के नकारात्मक और सकारात्मक विचारों से युद्ध और उसमें सही निर्णय लेने की शिक्षा मिलती हैं ।

*गीता जीवन को बनाती हैं ,खुशहाल*
गीता एक मां की तरह हमारे अंदर श्रेष्ठ संस्कारों का सृजन करती हैं । गीता मनुष्य के जीवन को खुशहाल ही नहीं बनाती बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती हैं ।

*गीता की शिक्षा द्वारा लोगों को जोड़ना*
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की गीता प्रवक्ता ,तपस्विनी शशि प्रभा दीदी जी ने के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा दिनांक 26 जनवरी से फरवरी तक चलेगा। इससे गीता के 18 अध्यायों का आध्यात्मिक रहस्यों का प्रगटी करण, ज्ञान ,योग, कर्म , अकर्म, विकर्म का बोध, कर्म योग, परम सत्य का बोध, भगवान श्रीकृष्ण विराट स्वरूप दर्शन, विभूति योग, सृष्टि का अनादि सत्य, कल्पतरु कथा, राजयोग भक्ति योग आदि का रसपान कराया जायेगा । इस अवसर पर देवांगन दंपत्ति ने नगर वासियों से आग्रह किया हैं कि अवसर का लाभ उठाएं ।




