चांपा ( सलवा जुडूम मीडिया) मितानिनें स्वास्थ्य व्यवस्था की जीवनदायिनी आज अपनी मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। रायपुर में प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहीं मितानिन बहनों को रोकना, गिरफ्तार करना और मुख्य मार्गों पर रोके रखना सरकार की दमनकारी नीति और लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन है। रायपुर में मितानिनों की धरना कार्यक्रम में शामिल होने जा रही मितानिनों को रेलवे स्टेशन में पुलिस द्वारा जबरन रोके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला कांग्रेस कमेटी नागेंद्र गुप्ता ने कहीं वर्ष 2002 से मितानिनें मातृ-शिशु देखभाल, टीकाकरण, पोषण सुधार, संक्रामक रोग नियंत्रण और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ रही हैं। इसके बावजूद उन्हें आज भी मात्र कार्य-आधारित प्रोत्साहन राशि मिलती है, जो न्यूनतम मजदूरी का आधा भी नहीं है। कई बार तो तीन-चार माह तक भुगतान नहीं होता, जिससे उनका परिवार संकट में आ जाता है।
एनजीओ के माध्यम से ठेका पद्धति समाप्त कर सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में शामिल किया जाए। ब्लॉक समन्वयक, प्रशिक्षक और हेल्प-डेस्क फैसिलिटेटर को नियमित मासिक वेतन मिले।
चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार द्वारा किया गया 50% वेतन वृद्धि का वादा तुरंत लागू हो। मितानिन कल्याण कोष के लाभ बिना भेदभाव और विलंब के मिलें। भाजपा ने चुनाव से पहले मितानिनों का सम्मान बढ़ाने का वादा किया था, पर आज तक वे वादे अधूरे हैं। सरकार का दमन और वादा-खिलाफी न केवल मितानिनों का अपमान है, बल्कि पूरे ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर करने की साजिश है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और सरकार से तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग करते हैं।


