जांजगीर-चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) इस दुनिया में कोई किसी के साथ ना आता हैं और ना ही जाता हैं । यह दुनिया दु:खालय हैं । दुःख से ऊपर उठकर मोक्ष प्राप्त करने की कथा हैं श्रीमद्भागवत कथा महापुराण ! गुरु इस संसार में जीते-जागते परमात्मा हैं । सदगुरु अपने दिव्य ज्ञान द्वारा शिक्षा देकर आत्मबोध कराते हैं, इसलिए गुरु परमात्मा रुप में हैं । हनुमान जी को गुरु बना लेने से सब कष्ट अपने आप दूर हो जाता हैं । उक्त उद्गार सज्जन अग्रवाल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य के छठवें दिन व्यासपीठ पर विराजमान पं विजय शंकर मेहता जी ने कहा !

*मित्रता में धनवान और गरीब का भेदभाव नहीं होनी चाहिए ।*
पंडित विजय शंकर मेहता, अंतरराष्ट्रीय कथावाचक ने कहा कि इस संसार में भगवान श्रीकृष्ण और गरीब सुदामा की मित्रता सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि मित्रता में धनवान और गरीब का भेदभाव नहीं होना चाहिए ।

*भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा की कथा ।*
प्रचलित कथा के अनुसार बालपन में श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि के आश्रम में एक साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे थे । इसी आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता हुई । एक दिन गुरुमाता ने इन दोनों को लकड़ियां लेकर आने के लिए कहा । गुरुमाता ने सुदामा को दोनों के लिए चने दिए थे और कहा था कि ये तुम दोनों बराबर बांटकर खा लेना । जंगल में पहुंचकर सुदामा ने वोचने अकेली ही खा लिए। जब सुदामा चने खा रहे थे, तब श्रीकृष्ण ने सुदामा से पूछा था कि तुम क्या खा रहे हो ? तब सुदामा ने झूठ बोला कि ठंड की वजह से मेरे दांत बज रहे हैं । आश्रम में शिक्षा पूरी होने के बाद दोनों मित्र अलग हो गए ।बहुत समय बाद श्रीकृष्ण द्वारिकाधीश हो गए थे और सुदामा गरीब ही थे । गरीबी से दुखी होकर सुदामा की पत्नी ने उन्हें श्रीकृष्ण से मदद मांगने के लिए द्वारिका भेजा । जब सुदामा अपने प्रिय मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे तो महल के सैनिकों ने उन्हें अंदर नहीं आने दिया । जब श्रीकृष्ण को मालूम हुआ कि सुदामा आए हैं तो वे खुद सुदामा को लेने पहुंच गए । उन्होंने सुदामा का सत्कार किया। एक मित्र को दूसरे मित्र के साथ कैसे रहना चाहिए ये श्रीकृष्ण ने सिखाया हैं । सुदामा अच्छी तरह आतिथ्य सत्कार किया और सुदामा को विदा करते समय खाली हाथ भेज दिया । सुदामा भी श्रीकृष्ण से कुछ मांग नहीं सके। बाद में सुदामा जब अपने गांव पहुंचे तो उन्होंने देखा कि श्रीकृष्ण ने उनकी सभी परेशानियां खत्म कर दी हैं ।

*श्रीकृष्ण और गरीब सुदामा की मित्रता की सीख।*
श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से हमें यह सीखने को मिता हैं मित्रता में सभी समान होते हैं हमें अमीरी-गरीबी को महत्व नहीं देना चाहिए ।

*श्रीमद्भागवत कथा के बाद हमारा जाना पक्का तय हैं ।*
इस अवसर पर आयोजित कथा में पं मेहता जी ने कहा कि सप्त-दिवसीय कथा के बाद हमारा जाना पक्का हैं, सज्जन अग्रवाल ने सब कुछ व्यवस्था करके रखा हैं । ईश्वरीय कृपा हैं कि इस वर्ष हमारे आश्रम तक बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा वरना आप सबसे मांगना पड़ता । पंडित जी ने कहा कि सुदामा स्वाभीमानी था, भगवान श्रीकृष्ण के द्वार पर आने के बाद भी अपने लिए कुछ नहीं मांगा, भगवान ने उन्हें सब कुछ दे दिया । श्रीकृष्ण ने मन ही मन कहा था कि भगवान ने मुझे संपत्ति के रुप में भले ही कुछ नहीं दिया लेकिन इतना प्रेम दिया तो कृष्ण को स्मरण किया । कथा श्रवण करने वालों में मुख्यतः प्रतिक, प्रवीण, निकेत, सिद्धार्थ,विशाल, विधायक जांजगीर-चांपा व्यास नारायण कश्यप, पूर्व विधायक नारायण चंदेल, डॉ खिलावन साहू,नागेंद्र गुप्ता, सुनील साधवानी, डॉ रविन्द्र द्विवेदी, शशि भूषण सोनी, डॉ रामखिलावन यादव सहित अन्यान्य लोग सहभागी रहे ।

*महराज जी से आशीर्वाद लेने कतार लगी रही ।*
श्रीमद्भागवत महापुराण वह ग्रंथ हैं, जिसकी पंक्ति-पंक्ति में देवी-देवताओं की कथाएं हैं । जीवन प्रबंधन गुरु पं विजय शंकर मेहता अपनी सात-दिवसीय कथा में विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से जीवन प्रबंधन से जोड़कर सारगर्भित व्याख्या कर रहे हैं । उनके प्रवचनों से प्रभावित होकर श्रद्धालु मंच पर विराजमान पं मेहता जी से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं । श्रद्धालु कतारबद्ध होकर महराज जी को प्रणाम करते और उनके हाथों राधे-राधे दुपट्टा तथा प्रसाद लेकर संतुष्टि प्राप्त करते हैं । आयोजक दंपत्ति सज्जन और उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति किरण अग्रवाल सबसे हाथ जोड़कर मिलते हैं । जनादेश न्यूज़ के संपादक डॉ राम खिलावन यादव तथा लेखक शशिभूषण सोनी से कहा- ‘आप लोग नास्ता या हो सके तो भोजन करके जरुर जाना ! व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से शानदार इंतजाम । अग्र परिवार के सहदयता और श्रद्धा भक्ति को कागज-कलम से लिख पाना संभव नहीं।

*श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य श्रवण करने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे ।
चांपा-कोरबा रोड स्थित सज्जन अग्रवाल के निवास स्थान पर हुई कथाओं के दौरान पधारने वालों में मुख्यतः सुभाषचंद्र अग्रवाल, आभा ज्वेलर्स बिलासपुर, रामअवतार अग्रवाल बिलासपुर , आर के अग्रवाल बिलासपुर, विमल चोपड़ा बिलासपुर, अशोक अग्रवाल नैला-जांजगीर, राधेश्याम अग्रवाल कोरबा, एलपी अग्रवाल इंदौर, पंकज लाहोटा परिवार मुम्बई , विकास अग्रवाल कोलकाता , आशीष अग्रवाल भिलाई , जितेंद्र अग्रवाल नैला , जितेंद्र भोपालपुरिया, राजू अग्रवाल, विमल नीलू अग्रवाल रायपुर, शिशिर पालीवाल नैला, अभिवन शर्मा भिलाई , सक्ति सिंग, सबरजीत घोष, नारायण अग्रवाल सक्ति, विमलचंद जालान, स्नेहिल सिंह भारद्वाज,विमल चन्द्र रायपुर , श्रीमति शांता सोमानी, सरोज मुंदड़ा,शारदा गोयल,आरती देवांगन, संगीता अग्रवाल, शशिप्रभा सोनी, डॉ श्रीमति भारती शर्मा, प्रोफेसर नीलिमा पाण्डेय चांपा सहित अन्यान्य लोग सहभागी बने ।



