श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य में सलवा जुडूम न्यूज़ के संपादक भूपेंद्र देवांगन और लेखक शशिभूषण सोनी ने अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित विजयशंकर मेहता जी से पुष्पगुच्छ भेंटकर अभिनंदन किया, बदले में मेहता जी ने दोनों को राधे-राधे दुपट्टा व श्रीफल देकर आशिर्वाद दिया ।

जांजगीर-चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) जीवन में आने वाले दुःख , कठिन निर्णय और अपनों से बिछड़ने की घटनाएं हमारी कमजोरी नहीं बल्कि हमारी ताकत होनी चाहिए, साथ ही साथ जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों को समय रहते आत्मसात करता हैं , वही वास्तव में मजबूत और सफल बनता हैं । उक्ताशय के उद्गार उज्जैन मध्यप्रदेश से पहुंचे सुप्रसिद्ध जीवन प्रबंधन गुरु तथा श्रीमद्भागवत कथाकार पंडित विजय शंकर मेहता जी ने कही । उन्होंने गीत-संगीत के माध्यम से श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य का आयोजन दिनांक 31 अगस्त, 2025 से दिनांक 06 सितंबर , 2025 तक कोरबा रोड स्थित सज्जन अग्रवाल के निवास स्थान पर दिव्य मंत्रोच्चारण के साथ हवन-पूजन करके सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर चुटकी लेते हुए मेहता ने कहा कि जीवन में सुख-दुख आते रहेंगे ,हम गोबर से बनी हुई कड़डे रखकर स्वाहा स्वधा बोले । कंड्डे को बैडरूम जैसे नकारात्मक स्थान पर जरुर रखे, जहां सबसे ज्यादा उपद्रव होते हैं। पूजा स्थल पर हमारे द्वारा अभिमंत्रित हनुमानजी की मूर्ति स्थापित करे,उनकी पूजा-अर्चना रोज करे । कथा स्थल पर रखें । घर हो या बाहर शांति जरुर मिलेंगी । उन्होंने श्रद्धालु-जनों को पति-पत्नी और बच्चों की संवाद सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । उन्होंने कहा कि इस संसार में हमें कोई शांत नहीं कर सकता, आपकी शांति के लिए आप ही जिम्मेदार हैं ।

*जीवन में संघर्ष ! जीवन ही संघर्ष का दुसरा नाम*
सप्त-दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में पंडित मेहता जी ने बहुत ही विद्वतापूर्ण और गहन सोच-विचार कर श्रद्धालु-जनों के सामने तर्कसंगत विचार रखते हैं । वे करीब 75 विषयों पर एकदिवसीय व्याखान भी दे चुके हैं । इनमें एक शाम हनुमान के नाम, एक शाम परिवार के नाम, हनुमानजी और परिवार प्रबंधन, तुम्हारे लिए, एक शाम गौमाता के नाम,एक शाम गणेशजी के नाम, एक शाम मंथरा के नाम, एक शाम मां के नाम, शक्ति के नाम, गीता के कृष्ण, सदगुरु के नाम, राधे-राधे, हम होंगे कामयाब आदि-आदि ।

*संघर्ष ही जीवन का दूसरा नाम ।*
उन्होंने एक प्रसंग में कहा कि ‘ संघर्ष ही जीवन का दूसरा नाम हैं , जो मनुष्य कठिनाई को भी अवसर के रुप में देखता हैं और जो मनुष्य कठिनाई को अवसर के रुप में देखता हैं ,वही जीवन में ऊंचाईयों को छूता हैं ।

*चंचल मन , जिसे नियंत्रित करना आवश्यक हैं ।*
उन्होंने कहा कि मनुष्य की सबसे बड़ी चुनौती उसका चंचल मन हैं, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक हैं । जब तक मन नियंत्रित नहीं होता जीवन में सफलता संभव नहीं।योग ही वह साधन हैं जो मन,शरीर और आत्मा को संतुलित रखता हैं । योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि मानसिक अनुशासन और आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता हैं। इसीलिए धार्मिक ग्रंथों में भी योग की सलाह दी जाती हैं ।

*तर्क और विचार बांटे , साथ में आध्यात्मिक ज्ञान भी ।
*श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य में पं मेहता ने बहुत ही विद्वतापूर्ण और गहन सोच-विचार कर अपनी बातें कही । उन्होंने कहा कि जीवन में सुख और दुःख हर मनुष्य के पास आता हैं सुख हमें कृतज्ञ होना सिखाता है वही दुःख हमें अंदर से मजबूत बनाता हैं । जीवन में संतुलन वही ला सकता हैं जो दोनों स्थितियों को समान भाव से स्वीकार करें ।

*सलवा जुडूम न्यूज़-24 परिवार का स्वागत ।*
कथा का रसास्वादन करने भूपेंद्र देवांगन संपादक सलवा जुड़ूम न्यूज़ , लेखक तथा साहित्यकार शशिभूषण सोनी , जीत बहादुर साहू पहुंचे । व्यासपीठ पर विराजमान पं विजय शंकर मेहता तथा सज्जन अग्रवाल परिवार की ओर से तिलक, राधे-राधे दुपट्टा तथा श्रीफल भेंट कर स्वागत अभिनन्दन किया । इस अवसर पर संचालन डॉ रविन्द्र द्विवेदी तथा ऐश्वर्य द्विवेदी ने किया । धर्म और आध्यात्म के प्रति नई सोच, पैनी दृष्टि और बेजोड़ वाक शैली के धनी पं मेहता जी का स्वागत-सत्कार सलवा जुडूम न्यूज़ के तीनों सदस्यों ने किया और कथा के दौरान समय-समय पर प्रकाशित कथा महात्म्य के विषय में जानकारी दी गई । सलवा जुड़ूम में प्रकाशित और प्रसारित होने पर मेहता जी के आध्यात्मिक प्रवचन को पाठकों ने खूब सराहा और लेखन शैली की प्रशंसा की ।




