बिलासपुर(सलवा जुडूम मीडिया) आज के समय में जहां जीवन की भागदौड़ और भौतिकता की चकाचौंध में इंसान अक्सर अपने ही कामों में उलझा रहता है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समाज के सबसे कमजोर और बेसहारा वर्ग के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। इन्हीं में से एक है अमोल जन सेवा संस्थान, जिसने अपने सात वर्षों की सेवायात्रा में हजारों गरीब परिवारों और भूखे लोगों को भोजन उपलब्ध कराकर इंसानियत की सच्ची परिभाषा लिखी है।

सात वर्षों की अनवरत सेवा
अमोल जन सेवा संस्थान की नींव सात वर्ष पहले रखी गई थी। शुरुआत भले ही छोटे स्तर पर हुई हो, लेकिन आज संस्था ने बिलासपुर शहर में अपनी पहचान एक ऐसी सेवा संस्था के रूप में बनाई है जो गरीबों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं। संस्था ने हर सप्ताह दो दिन – मंगलवार और गुरुवार को जरूरतमंदों को पका हुआ भोजन कराने का संकल्प लिया, और आज यह संकल्प लगातार निभाया जा रहा है।

रेलवे स्टेशन, बुधवारी बाजार और शहर के अलग-अलग हिस्सों में बसे गरीब, मजदूर, रिक्शा चालक, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवार और बेसहारा लोग संस्था की इस सेवा से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

भोजन ही नहीं, सम्मान भी
संस्था का मानना है कि गरीब और बेसहारा लोगों को सिर्फ भोजन कराना ही सेवा नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक वह भोजन उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। संस्था के सदस्य भोजन बाँटते समय हर जरूरतमंद से आत्मीयता और अपनापन दिखाते हैं। यही वजह है कि लोग इसे सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि भगवान का प्रसाद मानते हैं।

जोगी जगत न्यूज़ नेटवर्क की पड़ताल
जोगी जगत न्यूज़ नेटवर्क ने जब इस सेवा का प्रत्यक्ष अनुभव लिया, तो कई भावुक दृश्य सामने आए।रेलवे स्टेशन पर बैठी एक बुजुर्ग महिला ने बताया – “हमारे पास रोज-रोज चूल्हा जलाने की ताकत और साधन नहीं है। जब ये लोग आते हैं, तो हमें लगता है भगवान ने हमारी सुन ली।”वहीं, बुधवारी बाजार में रेहड़ी लगाने वाले एक मजदूर ने कहा – “दिन भर मेहनत करने के बाद भी पेट भर खाना मिलना मुश्किल हो जाता है। अमोल जन सेवा संस्थान की यह सेवा हमारे लिए जीवन का सहारा है।

”समाज में जागरूकता का संदेश
अमोल जन सेवा संस्थान का यह कार्य न केवल भूखों का पेट भर रहा है बल्कि समाज में जागरूकता भी फैला रहा है। संस्था का मानना है कि यदि हर सक्षम परिवार अपने आसपास के एक-एक जरूरतमंद की जिम्मेदारी ले ले, तो कोई भी भूखा नहीं सोएगा।संस्थान के स्वयंसेवक समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं, जिसमें युवाओं को समाजसेवा के लिए प्रेरित किया जाता है।

भूख मिटाने का सबसे बड़ा धर्म
भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही “अन्न दान” को सबसे बड़ा दान माना गया है। अमोल जन सेवा संस्थान इसी भावना को आत्मसात करते हुए गरीबों और बेसहारा लोगों की सेवा कर रहा है। संस्था के कार्यकर्ता इसे केवल सेवा ही नहीं, बल्कि धर्म, करुणा और मानवता का संगम मानते हैं।

आगे की योजनाएँ
संस्थान का उद्देश्य आने वाले समय में इस सेवा को और बड़े स्तर पर पहुँचाना है। वर्तमान में सप्ताह में दो दिन भोजन कराया जाता है, लेकिन संस्था का सपना है कि इसे सप्ताह के सातों दिनों तक विस्तारित किया जाए। इसके लिए संस्था समाज के सक्षम वर्ग से सहयोग की अपील कर रही है।
संस्था यह भी योजना बना रही है कि भविष्य में गरीब बच्चों की शिक्षा, वृद्धजन की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।

जोगी जगत का संदेश
जोगी जगत न्यूज़ नेटवर्क मानता है कि ऐसी पहलें समाज में सकारात्मकता और भाईचारे को बढ़ावा देती हैं। अमोल जन सेवा संस्थान ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची सेवा वही है जिसमें बिना किसी स्वार्थ के इंसानियत को महत्व दिया जाए।


