चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) कोसा, कांसा और कंचन की नगरी चांपा के शिवाय मारुति बिहार कालोनी, शासकीय बिसाहू दास महंत चिकित्सालय के पास श्रीमद्भागवत कथा का शुभांरभ कलश यात्रा निकालकर की गई । दिनांक 12 नवंबर 2025 से 19 नवंबर 2025 तक सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन तपसी आश्रम डोगाघाट मंदिर के पास हसदेव नदी के तट पर जल कलश भरकर कलशयात्रा निकाली गई । परंपरागत पीली और लाल साड़ियों में सौभाग्यवती मातृ-शक्ति , बहनें और छोटी-छोटी कन्याएं बैंड-बाजा एवं भजन-कीर्तन के साथ दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर डोगा घाट से कलश यात्रा प्रारंभ होकर मोदी चौक, थाना चौक, लायंस चौक होते-होते यज्ञ स्थल मारुती बिहार पहुंची । शोभायात्रा में के अग्र पंक्ति में आयोजक दंपति रामबिलास देवांगन – श्रीमति अमृता देवांगन, अखिलेश देवांगन – श्रीमति काजल देवांगन और पीछे-पीछे महिलाएं कलश धारण कर चल रही थी । सुसज्जित पांच घोड़े की बग्घी पर छत्तीसगढ़ के गौरव, माटी पुत्र, राष्ट्रीय कथा वाचक,पूज्य नारायण महराज , श्रीराधे निकुंज रोहणी धाम,जांजगिरी,भिलाई -3 विराजमान रहे । कलश यात्रा जिस मार्ग से होकर गुजरती हुई आगे बढ़ रही थी, श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा के साथ जगह-जगह महराजश्री का आदर पूर्वक हाथ जोड़कर स्वागत किया । शोभायात्रा में शामिल होने देवांगन समाज, ब्रम्हाण समाज , स्वर्णकार समाज सहित मारुती विहार कालोनी की महिलाओं के साथ-साथ पुरुष और बच्चे शामिल हुए । कलश यात्रा श्रीमद्भागवत कथा स्थल मारुती विहार तक पहुंची ।

*महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण समस्त शास्त्रों का सार तत्व हैं ।*
श्रीमद्भागवत कथा के मर्मज्ञ एवं राष्ट्रीय कथा वाचक नारायण महराज जी ने प्रथम दिन वेद पूजन,भागवत पुराण की महत्ता और शुकदेव जन्म की कथा पर विस्तार पूर्वक प्रवचन दिया और महराज श्री ने कहा कि कैसे अत्यंत पापी धुंधकारी भी कथा को सुनकर मोक्ष पा गया । उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण समस्त शास्त्रों का सार तत्व हैं और जीवन का व्यवहार हैं । श्रीमद्भागवत कथा 18 पुराणों में से एक हैं । इसके 12 खंड 335 अध्याय और 18000 श्लोक हैं।इस महान ग्रंथ के नायक भगवान श्रीकृष्ण हैं ।

*श्रीमद्भागवत कथा के मार्मिक रहस्यों का विवेचन*
भागवत महापुराण के दिव्याति दिव्य कथाओं के मार्मिक रहस्यों का प्रतिपादन करते हुए नारायण महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन में तीन उद्देश्यों के लिए की जाती हैं । पहला पितृ तृप्ति के लिए,दुसरा वर्तमान को साधन बनाने के लिए और तीसरा बच्चों का भविष्य संवारने के लिए की जाती हैं । प्रवचन शुरू होने से पहले पंडित जी का पुष्पाहार से स्वागत रामबिलास – श्रीमति अमृता देवांगन, अखिलेश – काजल देवांगन, संतोष – रश्मि , शंकर संतोषी, राजेन्द्र कलीबाई, नोहर लाल -, चंद्रकला देवांगन, रामविलास , देवेंद्र, भूपेन्द्र देवांगन, शशिभूषण सोनी , श्रीमति संगीता पाण्डेय सहित गणमान्य नागरिकों ने किया । अंत में कथा आयोजक परिवार ने व्यासपीठ की आरती की ।

*कलश पर वरुण देव आकर विराजमान होते हैं ।*
देवपूजन में सबसे पहले कलश का पूजन किया गया, क्योंकि जल भरे हुए कलश पर वरुण देव आकर विराजमान होते हैं । दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर डोगा घाट मंदिर से भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह को गाजें-बाजें के साथ अपने दोनों हाथों में पकड़कर रामविलास देवांगन एक समूह में भजन गाते आयोजन स्थल तक कलशयात्रा के साथ पैदल चल रहे थे। रथ पर बैठे पं जी महाराज लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे । यह शोभायात्रा वास्तव में कोसा ,कांसा और कंचन की नगरी चांपा के श्रद्धालु जनों को श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने का आमंत्रण हैं ।शशिभूषण सोनी ने बताया कि शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल पहुंची। जगह-जगह जल, शीतल पेय और स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी । शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण जी की सुसज्जित नयनाभिराम मूर्ति , पारंपरिक परिधान में महिला और पुरुष,मंगल ध्वनि और ढोल-नगाड़े के गूंज और साथ चल रहे श्रद्धालु भक्तों का उत्साह और उमंग से पूरी तरह से वातावरण भक्तिमय हो उठा । इसी के साथ ही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ, यह कथा दिनांक 19 नवंबर,2025 तक जारी रहेगी । मेकरुराम , गोपाल, रामगोपाल, राम खिलावन , देवेंद्र, जीतेंद्र, सुरेन्द्र, चंद्रकांत,अशोक, संतोष,देवचरण और महेंद्र देवांगन ने कथा श्रवण करने के लिए निवेदन किया हैं ।


