रायपुर (सलवा जुडूम मीडिया)
*सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने अपने घोषणा पत्र -’’मोदी की गारंटी’’ में, सरकार बनने पर 56 हजार शिक्षकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती करने का वादा किया था। किन्तु सरकार बनने के बाद इसके विपरीत कार्य करते हुए प्रदेश के लगभग 10 हजार स्कूलों को मर्ज करने के नाम पर सरकार बंद करने जा रही है। यह केवल शब्दों की जादूगरी है कि हम बंद नही मर्ज कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षक सेटअप में बदलाव कर प्रदेश के लगभग 40 हजार से अधिक शिक्षकों को अतिशेष बताते हुए उनका जबरिया स्थानांतरण किया गया। इसे प्रशासनिक दादागिरी न कहें तो क्या कहें..?*
जब से छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षकों के युक्तियुक्तरण का फैसला लिया है, तब से इसे लेकर पूरे प्रदेश में बवाल मचा हुआ है। एक तरफ विपक्ष इसे बहुत बड़ा मुद्दा बना रहा है वहीं सत्ता पक्ष के लोग भी इससे खासे नाराज दिखाई दे रहे हैं। शासन के इस रवैये से त्रस्त हैं शिक्षक, दबे जुबां से लोगों का कहना है कि यह तानाशाही की पराकाष्ठा है। इसी मुद्दे को लेकर नवयुगीन संत, माँ काली के उपासक और पंचदशनाम गुरूदत्त अखाड़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी सुरेन्द्र नाथ ने शिक्षकों के इस युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को पूर्ण अव्यावहारिक और शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाला बताया है।
उन्होंने युक्तियुक्तकरण के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब-जब शिक्षकों पर अत्याचार हुआ है, सरकार का सिंहासन डोला है। शिक्षक समाज के नींव का पत्थर है, जो दिखता तो नहीं लेकिन खामोशी से समाज का निर्माण करता रहता है, वो समाज की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, और किसी भी सरकार को बनाने एवं बिगाड़ने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में “गुरू ब्रह्मा गुरू विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः” अर्थात गुरू को परब्रह्म के समान दर्जा दिये गया है और छ.ग. में आज वही शिक्षक प्रताड़ित है। आज छत्तीसगढ़ प्रदेश में युक्तियुक्तकरण के कारण 40 हजार से अधिक शिक्षक सरकार के इस तानाशाही रवैये से आक्रोशित हैं। सरकार में उनकी बातों को सुनने वाला कोई नही है। आज छत्तीसगढ़ में मंत्री भी बेबस हैं, उनकी बातों को कलेक्टर, कमिश्नर, डी.ई.ओ. यहां तक मामूली सा बीईओ भी महत्व नही दे रहा है। छ.ग. मेें प्रशासनिक दादागिरी हावी हो चुकी है। संगठन के पदाधिकारी गण भी आक्रोशित हैं, उनकी भी नहीं सुनी जा रही है। यदि इसी तरह से छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक दादागिरी हावी रही तो इस सरकार को डुबने से कोई रोक नही सकता। राज्य के बड़े पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी राज्य के मुखिया को गुमराह कर रहें हैं। आई.ए.एस. अधिकारी पेपर में आंकड़ा बनाकर मंत्री को दिखाते हैं किन्तु धरातल पर उसका क्या असर होगा ये नही सोचते, यही कारण है कि आज सरकार बनने के मात्र डेढ़ साल के भीतर ही राज्य में वर्तमान सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ने लगा है।
सत्ता में आने से पूर्व भाजपा ने अपने घोषणा पत्र -’’मोदी की गारंटी’’ में, सरकार बनने पर 56 हजार शिक्षकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती करने का वादा किया था। किन्तु सरकार बनने के बाद इसके विपरीत कार्य करते हुए प्रदेश के लगभग 10 हजार स्कूलों को मर्ज करने के नाम पर सरकार बंद करने जा रही है। यह केवल शब्दों की जादूगरी है कि हम बंद नही मर्ज कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षक सेटअप में बदलाव कर प्रदेश के लगभग 40 हजार से अधिक शिक्षकों को अतिशेष बताते हुए उनका जबरिया स्थानांतरण किया गया। जबरिया इसलिए कि आधी रात को शिक्षकों की लिस्ट बनाई गई। सुबह लिस्ट जारी कर उन्हें काउंसलिंग में बुलाते हैं और उनका स्थानांतरण उनके निवास स्थान से 150 किलोमीटर दूर कर देते हैं। इस संपूर्ण प्रक्रिया में न तो शिक्षकों का पक्ष सुना गया और न ही उन्हें दावा आपत्ति करने का अवसर दिया गया। इसे प्रशासनिक दादागिरी न कहें तो और क्या कहें…? डी.एड. बी.एड. प्रशिक्षित बेरोजगार भी रोजगार के लिए आंदोलन रत हैं।
*नियमों का अनदेखी*
युक्तियुक्तकरण की संपूर्ण कार्यवाही एकतरफा, भेदभावपूर्ण, तानाशाही पूर्ण एवं शिक्षकों को अनावश्यक प्रताड़ित करने वाला है। स्कूल शिक्षा विभाग युक्तियुक्तकरण लिए निर्देश जारी करता है। मैदानी स्तर पर तैनात अधिकारी उन निर्देशों का अपने-अपने हिसाब से अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं। इससे जहां सूची में एकरूपता नही है, वहीं कई शिक्षक नियमों के विपरीत अतिशेष की श्रेणी में आकर स्थानांतरित हो गये हैं। मजबूरन उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पडी है। इससे शिक्षक एवं उनके परिवार मानसिक रूप से तनाव में हैं तथा उनको आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2014 में भी युक्तियुक्तकरण हुआ था किन्तु उसमें शिक्षकों को जिले के अंदर ही रिक्त पदों पर समायोजित कर दिया गया था। किंतु जांजगीर चांपा जिले में 109 पद रिक्त होते हुए भी 109 शिक्षकों को जिले से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है।
*नवागढ़ बी.ई.ओ. का तानाशाही पूर्ण आदेश* स्वामी सुरेन्द्र नाथ जी ने नवागढ़ बी.ई.ओ. के आदेश के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि- क्या वे अपने आप को शासकीय नियमों से ऊपर मानते हैं। 7 जून को शिक्षकों की काउंसलिंग हुई, उनके युक्तियुक्तकरण आदेश में 03 दिवस के भीतर कार्यमुक्त होने का निर्देश है। 8 जून को रविवार था, इस हिसाब से 11 जून को 03 दिवस पूर्ण होता है। निर्धारित तिथी तक शिक्षकों के कार्यमुक्त होने का इंतजार न कर बी.ई.ओ. नवागढ़ के द्वारा शिक्षकों को 10 तारीख से ही एकतरफा कार्यमुक्त किया जाना उनके तानाशाही एवं स्वेच्छाचारिता पूर्ण कृत्य को प्रदर्शित करता है। अभी जिले के अन्य विकासखंडों में इस प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई है, ऐसे में नवागढ़ बी.ई.ओ. ऐसा कर के क्या साबित करना चाहते हैं..? शिक्षकों का मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, कोर्ट उन्हें स्टे भी दे रहा है, ऐसे में बी.ई.ओ. नवागढ़ का आदेश तानाशाही की पराकाष्ठा है।
