जांजगीर चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) जांजगीर जिले पुलिस की उदासीनता से क्राइम रेट दिन ब दिन बढ़ते जा रहा है, लेकिन कोतवाली पुलिस आँखे बंद रखकर क्रिमिनल्स की मदद कर रही है, और गाँव वालों को केवल आश्वासन देकर भूल जाती है। मामला उदयबन्द पंचायत का है, जांजगीर से 5 किलोमीटर दूर उदयबंद गांव इन दिनों लगातार चोरी से परेशान है, जहां गांव वाले चोरों की करतूत से धनखोने के लिए मजबूर है, वही जांजगीर पुलिस की उदासीनता उनके दुखों को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, प्राप्त जानकारी के अनुसार उदय बंद गांव के ही युवक ने अपने घर में हुई चोरी की मार्मिक कहानी के साथ जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र देकर ग्राम उदयबंद में लगातार हो रही चोरी की शिकायत की है, बीते दिनों अपने घर में हुए चोरी की वारदात को दर्शाते हुए पुलिस द्वारा इस संबंध मे कोई भी कार्यवाही नहीं किए जाने की घटना को पुलिस की उदासीनता पर आक्रोश जाहिर किया है, युवक ने अपने पत्र में जिला पुलिस अधीक्षक को लिखा है कि दो पूर्व बीते माह में उसके घर से दो लाख रुपये सहित सोने चांदी के जेवर चोरी हुई थी,


जिसकी रिपोर्ट सिटी कोतवाली जांजगीर में दर्ज कराई गई थी किंतु दो माह व्यतीत हो जाने के बाद भी उक्त चोरी की घटना पर किसी प्रकार की खोज बिन कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है, साथ ही दो महीना में गांव में पांच-छह घरों में चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है पूरा गांव जान माल के डर से कांप रहा है, लेकिन जांजगीर सिटी कोतवाली की कान में जु तक नहीं रेंग रहा है, इस घटना से व्यथित गांव वासियों ने पुलिस अधीक्षक जांजगीर को पत्र लिखकर उदयबंद में लगातार हो रही चोरी की घटना का पर्दाफाश कर, चोरों को गिरफ्तार करने का निवेदन किया है, अब देखने वाली बात होगी कि इस खबर के प्रसारण उपरांत जांजगीर पुलिस की कार्यवाही में चोरों को पकड़ने में कितनी तेजी से होती है। अभी तो मीडिया के सामने अश्वाशनो की लड़ी लगी है।
जांजगीर-चाम्पा जिले में पुलिस की सुस्ती भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। खुले आम शराब की तस्करी हो रही है, नशीली दवाओं की तस्करी हो रही है। पुलिस से पूछे जाने पर पुलिस ही कहती है, हम कुछ नहीं जानते, हम कुछ नहीं कर सकते। कुछ ही दिनों पहले की बात है चाम्पा थाने अंतर्गत भारी मात्रा में नशीली दवाइयाँ मिलीं लेकिन शिकायतों के बावजूद जिले की पुलिस ने कुछ इस तरह से कार्यवाही करने का दिखावा किया, कि आज तक इतने बड़े जप्ती के बाद भी उसका स्रोत और मुखिया का पुलिस पता नहीं लगा सकी, पुलिसवालों द्वारा ऐसा लीपापोती किया गया कि मुख्य आरोपी का बचाव हो सके, जाँच कुछ ऐसा किया गया कि बीच की कड़ी ही काट दिया गया, ताकि किसी तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा सके। इसमें निश्चित ही पुलिस की मिलीभगत लगती है, मोटे कमीशन के लालच ने डिपार्टमेंट को निष्क्रिय बना दिया है। न जाने भ्रष्टाचार की राशि गृहमंत्री को भी पहुंचाया जा रहा है, या सरकार को इसकी भनक ही नहीं है, और सरकार के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। भले नशाखोरी से लोगों की जिंदगी तबाह हो, नशीली दवाओं की लत बच्चों की जान ले ले लेकिन पुलिसवालों ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है। प्रशासन भी उदासीन है, गृहमंत्री भी अपने विभाग के प्रति सजग होकर कार्य नहीं कर रहे। जिसे अपने कर्तव्यों का भान न हो ऐसे अधिकारियों, कर्मचारियों को चिन्हित कर उन पर तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। विभाग चाहे कोई भी हो जिसे जो कार्य सौंपा गया है, जिसकी तन्ख्वाह मिलती है, उन पैसों के प्रति निष्ठा ज्ञापित करते हुए हर पदाधिकारी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए, जो नहीं करते उसे प्रशासन तत्काल स्थानांतरित कर दण्डित करे। जनता जनार्दन के वोट से सरकार बनती है, और चलती है, उनके ही टैक्स के पैसों से वेतनभोगी वेतन प्राप्त करता है, तो जनता के प्रति अपने कर्तव्यों को भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करना चाहिए।

