चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) लच्छी बंध तालाब को पाटकर दुकान बनाए जाने का मामला शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है जहां शिकायतकर्ताओं में तहसीलदार के स्थगन के बाद भी कार्य नहीं रोके जाने का आक्रोश है वही इस संदर्भ मे तहसीलदार अवैध रूप से हो रहे तालाब के स्वरूप को बदलने का खेल को रोक पाने में असफल साबित हो रहे हैं।

ज्ञात हो कि चांपा में लक्षछीबंध तालाब को बचाने के प्रयास में जागरूक समाजसेवी लगे हुए हैं वही दूसरी ओर दुकान को पाटकर व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलने का गोरख धंधा खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है सच और झूठ के बीच इस यह संघर्ष नगर में चर्चा का रूप ले लिया है 150 वर्ष पूर्व जमींदार परिवार के पुण्य का यह तालाब आज निजी स्वार्थ और जन विरोधी सोच के चलते अपना स्वरूप पूर्ण रूप से बदल चुका है निस्तारी पत्रक में जहां पर इसे तालाब बताया गया है।


वहीं तालाब के स्वामी इसे जमीन बताने की फिराक में है वह दलील दे रहे हैं कि यह भूमि संपत्ति जमीन उनकी संपत्ति है किंतु यह समझ के परे हैं की डेढ़ सौ वर्षो से जिस तालाब में जन निस्तारी होता रहा वह तालाब अचानक निजी तालाब क्यों हो गया जबकि उस तालाब में नगर पालिका के तरफ से शासकीय मद से पचरी अहाता बनाई गई थी इन तमाम बातों का जवाब तालाब स्वामी पूर्व जमीदार के पास नहीं है और न ही प्रशासन इसमें कुछ कह पा रहा है शिकायतकर्ता रविंद्र मासूलकर के शिकायत पर कार्यवाही कर पाना संभव नहीं है का आदेश देते हुए तहसीलदार ने उक्त तालाब के स्वरूप को नहीं बदला जाना यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया था किंतु उसके आदेश को भी ठेंगा बताते हुए धड़ल्ले से दुकान बनाने का काम चल रहा है शिकायतकर्ता अपनी शिकायत लेकर बार-बार तहसील पहुंच रहे हैं लेकिन तहसीलदार एसडीएम उन्हें घुमावदार बातें करके चलता कर रहे हैं इस बीच तालाब को बचाए जाने के मुहिम की पूर्व से ही मुहिम चलाने वाले समाज सेवी गिरधारी यादव ने एसडीएम से मुलाकात करके तहसीलदार के द्वारा दिए गए स्थगन के बाद भी तालाब पर अवैध निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है इस पर एसडीएम ने नगर पालिका सी एम ओ को तुरंत फोन कर बनाए गए दुकानों के एन ओ सी के संबंध में जानकारी और संबंधित दुकान निर्माण कर्ताओं को नोटिस जारी करने के लिए कहा है अब देखना होगा कि चांपा नगर पालिका द्वारा एसडीम के निर्देश का पालन किस हद तक किया जाता है यदि समय रहते नगर पालिका अधिकारी ने दुकान तालाब के ऊपर दुकान बनाने वालों को नोटिस जारी कर पूछ लिया कि नगर पालिका के बगैर अनुमति के निर्माण कार्य क्यों किया गया तब तालाब पर किए गए निर्माण कार्य पर अवैधता की बिजली गिर सकती है ऐसी स्थिति में चांपा नगर पालिका द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश वी एन जी टी के आदेश का पालन करने में कोई मुश्किल नहीं होगी।

जिसमें किसी भी जल स्रोत तालाब नदी पोखर स्थल को पाटे जाने पर सख्त रोक लगाई जाने का निर्देश दिया गया है अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन एनजीटी के आदेश का पालन नगर पालिका, तहसील व एसडीएम किस हद तक कर पाने सफल साबित होते हैं तहसीलदार के स्थगन आदेश के बाद भी तालाब स्वामी द्वारा निर्माण कार्य नहीं रोके जाने पर बड़ी कार्रवाई किया जाना आवश्यक हो गया है इसमें बनाई गई दुकानों को तोड़कर लच्छी बंध तालाब को पुराने स्वरूप में लाया जा सकता है।



