जांजगीर चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) कृपालु जी महाराज के शिष्य डॉ स्वामी युगल शरण जी महाराज के सानिध्य में 30 नवंबर से दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर प्रांगण चांपा में 21 दिवसीय अद्वितीय, समन्वयात्मक, विलक्षण धारावाहिक दार्शनिक प्रवचन और रसमय संकीर्तन किया जा रहा हैं । इसका समापन 20 दिसंबर , 2025 को होगा । ब्रज किशोरी सेवा समिति ने भक्तों से शामिल होने का अनुरोध किया हैं ।

*ज्ञान मार्ग का विस्तृत विवेचन*
विलक्षण दार्शनिक प्रवचन श्रृंखला के 14 वें दिन परम पूज्य स्वामी युगल शरण जी ने ज्ञान मार्ग के विषय में विस्तृत व्याख्या की और कहा अनंत कोटि जीवों में से मनुष्य ही केवल भगवत प्राप्ति कर सकता हैं । क्योंकि मनुष्य का कुछ विशेषता हैं जिसके कारण वह भगवत्प्राप्ति कर सकता हैं । ज्ञान मार्ग एक ऐसा मार्ग हैं जिससे हम अपने जीवन में सकारात्मक दिशा में बदलने के लिए ज्ञान की प्राप्ति करते हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान मार्ग में हमें अपने आत्मा और परमात्मा को समझने का प्रयास करना चाहिए ।

*वरिष्ठ वैज्ञानिक ने आध्यात्मिक मार्ग चुना*
सलवा जुडूम के संपादक भूपेन्द्र देवांगन तथा दार्शनिक प्रवचन में गोता लगाने वाले लेखक शशिभूषण सोनी ने बताया कि डॉ स्वामी युगल शरण जी का जन्म उड़ीसा राज्य के एक वैष्णव परिवार में हुआ था। बचपन से ही साधु संगत उन्होंने पाया और अध्य्यन उपरांत भारत सरकार के अधीनस्थ एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में दस वर्षों तक अपनी सेवाएं दी । आचार्य श्री ने बताया कि ज्ञान दो प्रकार के होते हैं ।
पहला शाब्दिक ज्ञान – शाब्दिक ज्ञान वह होता हैं जब हमें शास्त्रों और पुस्तकों का ज्ञान होता हैं लेकिन हमने इसका प्रैक्टिकल अनुभव अभी तक नहीं किया हैं।
दूसरा हैं अनुभवात्मक ज्ञान – अनुभवात्मक ज्ञान वह होता हैं जब हमने ज्ञान का प्रैक्टिकल अनुभव किया हैं और हमें इसका साक्षात्कार हुआ हैं ।

*आत्मज्ञानी और परमात्म ज्ञानी का विवेचन*
विशाल पंडाल में जनसमूह को संबोधित किया । प्रवचन स्थल पर जिन महानुभावों को सम्मानित किया गया उनमें मुख्यतः विजय पाण्डेय, डॉ काशी राठौर, डॉ उमाशंकर दुबे, प्रमोद कुमार, और उनकी अर्द्धांगिनी श्रीमति निखार खूब चंदानी,रमेश कुमार सोनी, शशिभूषण सोनी, डॉ रवीन्द्र कुमार द्विवेदी, मिथलेश द्विवेदी, डॉ जीपी दुबे, श्रीमति शशिप्रभा सोनी, प्रभा शर्मा,संतोषी सराफ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल रहे। स्वामी जी ने गंगा में डुबकी लगाते हुए कहा कि आत्मज्ञानी और परमात्म ज्ञानी दो प्रकार के ज्ञानी होते हैं ।आत्मज्ञानी – आत्मज्ञानी वह होता हैं जो अपने आत्मा को जानता हैं लेकिन अभी पूर्ण ज्ञानी नहीं बना हैं।परमात्म ज्ञानी -परमात्म ज्ञानी वह होता हैं जो परमात्मा को जानता हैं और पूर्ण ज्ञानी हैं।
*ज्ञान मार्ग की प्रवेशिका क्लिष्ट हैं*
ज्ञान मार्ग की प्रवेशिका बड़ी ही क्लिष्ट हैं और इसके लिए हमें साधन चतुष्टय संपन्न होना आवश्यक हैं । साधन चतुष्टय में विवेक, वैराग्य, शमादिगुण शालिनता और मुमुक्षुत्व शामिल हैं ।
*मनुष्य ज्ञान प्रधान ही नहीं बल्कि कर्म प्रधान हैं*
दार्शनिक प्रवचन के 14 दिन महराज जी ने कहा कि मनुष्य ज्ञान प्रधान ही नहीं बल्कि धर्म प्रधान हैं । ज्ञान मार्ग एक ऐसा मार्ग हैं जिसमें हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में बदलने के लिए ज्ञान की प्राप्ति करते हैं । ज्ञान मार्ग में हमें अपने आत्मा और परमात्मा को जानने-समझने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए हमें साधन चतुष्टय संपन्न होना आवश्यक हैं ।


