भारत की बढती ताकत को रोकने के लिए विश्व में नए समीकरण बन रहे है ! भविष्य में अपनी लड़ाई हमें खुद के भरोसे लड़नी है !ऑपरेशन सिंदूर वो, आगाज है, जो दुनिया को संदेश देता है, कि कोई भी आतंकी हमला, अगले युद्ध की शुरुआत होगी और भारत अपने शत्रुओं से निपटने में सक्षम है, किन्तु दीमक की तरह राष्ट्र को छलनी करने वाले घर के भेदी ज्यादा खतरनाक हैं, जिनसे निपटने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं सच्चे राष्ट्रवाद की आवश्यकता है, राष्ट्र हित सर्वोपरि…!!
भारत में सेक्युलरिज्म इसलिए है, क्योंकि हिन्दू बहुसंख्यक है, धर्म पूछकर हत्या करने वालों को नहीं पता कि हम श्रीराम और श्रीकृष्ण के वंशज हैं। महाभारत के समय श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, यदि शांति चाहिए तो युद्ध करो, अपना हक चाहिए तो युद्ध करो, अपनो के मोह में पड़े बिना युद्ध करो पार्थ…, गीता का ज्ञान केवल कथाकारों द्वारा कथा करने के लिए नहीं है, इसे आवश्यकता पड़ने पर लागू करना भी हमें आता है। दुनिया को शांति का संदेश देने वाला, किसी भी देश पर प्रथम प्रहार न करने वाला देश-भारत, जब आतंक के विरुद्ध केवल प्रतिशोधात्मक कार्यवाही कर रहा था, तो पाकिस्तान युद्ध की तरह प्रहार कर रहा था, लेकिन केवल तीन दिनों की कार्यवाही में पाकिस्तान को अपनी वस्तुस्थिति का एहसास हो गया, और युद्ध विराम के लिए प्रयास करने में जुट गया।
ऑपरेशन सिंदूर ने देश को क्या सिखया…? देश में देशभक्तों से ज्यादा गद्दारों की संख्या में वृद्धि हो गई है, देश के बाहर के खतरे तो दिखाई देते हैं, जो अपने बनकर घर में ही छुपे हैं, सबसे बड़ा खतरा उनसे ही है। कल ही 14 लोगों को भारत की खुफिया जानकारी पाकिस्तानी एजेंसियों को साझा करने के कारण गिरफ्तार किया गया है। चंद पैसों की खातिर देश की सुरक्षा ही दाँव पर लगा दी इन्होंने, ये कोई बड़े पदों पर बैठे नेता या अधिकारी नहीं हैं, कोई सिक्योरिटी गार्ड है, कोई यूट्यूब है, तो कोई स्टूडेंट है, भारत हमेशा ही शत्रुओं से नहीं अपनो की गद्दारी के कारण हारता आया है, इतिहास साक्षी है।
पहलगाम हमले के बाद से न जाने कैसे-कैसे फैक्ट निकाल के सामने आ रहे हैं अगर पाकिस्तानियों को वापस जाने का आदेश न होता तो यहाँ किसी की 20-20 साल से, किसी की 40 साल से छुपी हुई कहानियां सामने न आतीं, जैसे भारत देश नहीं विश्व का धर्मशाला है। देश में बैठे, देश के गद्दारों के सहयोग से ही ऐसी घटनाएं होती आईं हैं, पहले भी ये साबित हुआ था, और इस दर्दनाक घटना ने भी सिद्ध किया। जिस माँ की कोख से जन्म लेते हैं, उसी के द्रोही हैं, जो पैदा तो भारत में होते और सहयोग पाकिस्तान का करते हैं, ऐसे जयचंदों की वजह से ही भारत मुँह की खाता है, लेकिन अब और नहीं, भारत ने जिस तरह से प्रतिकार किया है, और इस चुनौतीपूर्ण समय में नेताओं और जनता ने एकता का जो परिचय दिया है, वो सराहनीय है, और जिन सेलिब्रिटी और खिलाड़ियों ने चुप्पी साधी वो भी याद रखी जायेगी। ये भारत की जनता है, सिर आंखों पर बिठाना भी जानती है, और उतारना भी…! साथ ही जितने लोग युद्ध के विरोध में बोल रहे थे, उनको भी शत्रु के सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए।
शांति चाहिए तो युद्ध ज़रूरी है, महाभारत इसका सबसे सटीक उदाहरण है, कुछ लोग दुर्योधन की तरह हठी होते हैं, जिन्हें स्वयं जगतपति श्रीकृष्ण भी समझा नहीं सके इसलिए ऐसे मूर्ख हठियों को समझाने का एक ही मार्ग है, वो है युद्ध..।।
इसीलिए सीजफायर के बावजूद भारत ने पाकिस्तान पर सख्त रुख बनाए रखा है। ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है, सिंधु जल संधि स्थगित है, अटारी चेक पोस्ट बंद है और व्यापार पर रोक जारी है। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को सैन्य, रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई। सीजफायर के बाद भी भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखा है, जिससे भविष्य में आतंकवाद पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
भारत की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए विश्व में नए समीकरण बन रहे है ! भविष्य मे अपनी लड़ाई हमें खुद के भरोसे लड़नी है !
ऑपरेशन सिंदूर वो, आगाज है, जो दुनिया को संदेश देता है कि कोई भी आतंकी हमला, अगले युद्ध की शुरुआत होगी, और भारत अपने शत्रुओं से निपटने में सक्षम है, किन्तु दीमक की तरह राष्ट्र को छलनी करने वाले घर के भेदी ज्यादा खतरनाक हैं, जिनसे निपटने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं सच्चे राष्ट्रवाद की आवश्यकता है, राष्ट्र के प्रति बेशर्त वफादारी प्रत्येक नागरिक में होनी चाहिए। राष्ट्र हित सर्वोपरि, विशुद्ध राष्ट्रवाद से ही राष्ट्र सुरक्षित रह सकता है…!!