जांजगीर चांपा बिर्रा, (सलवा जुडूम मीडिया) दिनांक 5 अप्रैल 2026 : प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय सेवाकेंद्र में आज प्रातः 11.30 से आयोजित विश्वास एवं एकता के लिए आंतरिक गुणों की आवश्यकता विषय पर रायगढ़ से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्मा कुमारी रुक्मिणी ने कहा कि बिना आत्मा के निजी गुणों को कर्म व्यवहार में लाये बिना परिवार में विश्वास एवं एकता लाना संभव नहीं है l

उन्होंने कहा कि आज भाई भाई में, पिता पुत्र में, गुरु शिष्य में, मालिक नौकर में या कहें कि अपने आप में विश्वास को खो दिये है कारण स्वयं को पांच तत्वों का पुतला समझना, जब कि हम एक चैतन्य आत्मा हैं जो इस शरीर का मालिक है बिना आत्मा के इस शरीर का कोई अस्तित्व नहीं l अब ये विश्वास पुनः कैसे आयेगा इसके लिए इस सृष्टि पर किसी ईश्वरीय शक्ति के आगमन की जरुरत है क्योंकि सभी आत्माएं तमोगुणी हो चूके हैं l इसलिए परमात्मा को इस धरती पर आना पड़ता है क्योंकि सर्व गुणों के स्रोत परमात्मा ही है जिस प्रकार गर्मी का स्रोत सूर्य -अग्नि है, जल का स्रोत सागर है ठीक उसी प्रकार ज्ञान, पवित्रता,शांति, प्रेम,आनंद, सुखऔर शक्ति तथा दया, करुणा, नम्रता आदि अनेक गुणों का स्रोत परमात्मा ही है हम ये गुण किसी शरीर धारी से नहीं प्राप्त कर सकतेl

आगे कहा कि परमात्मा को इस सृष्टि पर आये 90 वर्ष हो गये हैं वे आत्माओं में राजयोग मैडिटेशन के द्वारा दिव्य गुणों का पुर्नस्थापन कर रहे हैं उन्होंने उपस्थित सभी श्रोताओं को इसका प्रेक्टिकल अनुभव करने सेवाकेंद्र में आने के लिए आमंत्रित किया है l संस्था के जांजगीर प्रक्षेत्र कीसंचालिका ब्रह्माकुमारी चन्द्रिका ने कहा कि हम आत्मा एक परमपिता परमात्मा की संतान होने के कारण आपस में भाई भाई है ये स्वीकार करने से ही आपस में विश्वास और एकता होगी l सभी धर्म पिताओं ने भी यही सन्देश दिया है l उन्होंने कहा कि आज जो भी संसार में समस्याएं है वे सब देह अभिमान के कारण ही है और इसका निवारण केवल आत्मिक ज्ञान में है l

राजगांगपुर ओडिशा से पधारी ब्रह्मा कुमारी राजमोहिनी ने कहा कि आत्मा का मूल स्वभाव सतोगुणी है अर्थात आत्मा सात गुणों से युक्त है जिस प्रकार शरीर पांच तत्वों से युक्त है तो हम समय समय पर शरीर को उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्यास होने पर जल, शक्ति की कमी होने पर भोजन, शुद्ध आक्सीजन देते हैं ऐसे ही आत्मा को भी जरुरत है जो केवल और केवल परमात्मा से ही मिल सकता है इसके लिए राजयोग ध्यान एक प्रभावी माध्यम है l राजयोग ध्यान आत्मा का मन परमात्मा से जोड़ने की एक विधि है जो इस संस्था द्वारा निःशुल्क सिखाया जाता है l
संस्थान का परिचय देते हुए बी. के. खुशबू ने कहा कि विगत 90 वर्षों से यह संस्था विश्व बधुत्व, विश्व शांति एवं विश्व एकता के कार्यों में सतत प्रयासरत है l मानव उत्थान के उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए इन्हे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अंतराष्ट्रीय शांति दूत तथा राष्ट्रीय स्तर के 5 पुरस्कार प्राप्त हो चूके है l वर्तमान में भारत सहित विश्व के पांचो महाद्वीपाे में इसकी 6500 सेवाकेंद्र कार्यरत है।
बिर्रा से अथिति के रूप में पधारे रिटायर्ड शिक्षक एम. एल. साहू ने कहा कि स्वं को कर्ता मानकर चलना ही समस्त समस्याओ की जड़ है, हम कोई ईश्वर नहीं है लेकिन ईश्वर की रचना है l यदि हम उनके आदेशों के अनुसार कर्म करें तो किसी से डरने की जरुरत नहीं है क्योंकि हम कर्तापन के भार से मुक्त हो जायेंगे जिसे ही मोक्ष कहा गया है l बिर्रा क्षेत्र के हरिभूमि पत्रकार डी.एन. देवांगन ने भी कार्यक्रम की सफलता एवं शिव ध्वजरोहन पर अपनी शुभकामनायें व्यक्त की l
कार्यक्रम का शुभारम्भ दिव्य गीत एवं ईश्वरीय स्मृति से हुआ l आये हुए सभी अतिथियों के स्वागत में कुमारी वाणी द्वारा स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया तथा ब्रह्मा कुमारी सरस्वती ने बैज एवं गुलदस्तो से स्वागत किया lइस कार्यक्रम का लगभग 150 श्रोताओं ने लाभ लिया l






