युवक अमित भंडारी की हत्या का पुलिस ने किया खुलासा, शव को 24 घंटे से अधिक समय तक छिपाकर रखा था; फावड़ा/रापा और सीढ़ी बरामद
जांजगीर चांपा मुलमुला(सलवा जुडूम मीडिया) थाना मुलमुला क्षेत्र के ग्राम कोसा में जून माह में हुई युवक अमित भंडारी की हत्या की गुत्थी पुलिस ने करीब दो माह की सघन जांच के बाद सुलझा ली है। पुलिस के मुताबिक हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग मुख्य वजह सामने आई है। मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों बजरंग सिंह निवासी कोसा, संतोषी सिंह निवासी हाथनेवरा चांपा (मायका कोसा) और पप्पू सिंह निवासी कोसा को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 27 जून 2026 की रात अमित भंडारी अपने घर से निकला था। इसके बाद 29 जून की सुबह उसका शव ग्राम कोसा के अमहदा तालाब के पास एक निर्जन बाड़ी में बरामद हुआ। गांव के बीच हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने हत्या के विभिन्न पहलुओं पर जांच शुरू की।
प्रेम प्रसंग से जुड़ा था मामला
जांच में सामने आया कि मृतक अमित भंडारी का गांव की ही संतोषी सिंह से विवाह से पहले से प्रेम प्रसंग था। पुलिस के मुताबिक विवाह के बाद भी दोनों के बीच फोन पर बातचीत जारी थी। अमित जब भी गांव लौटता था, दोनों के बीच मुलाकात और बातचीत होती थी।

घटना वाली रात भी दोनों के बीच करीब रात 1:30 बजे तक फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद लगभग 2:30 बजे अमित संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा। इसी दौरान संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम खत्म कर घर लौटा और घर के पीछे कुछ आवाज सुनकर वहां पहुंच गया।
पुलिस के मुताबिक बजरंग ने अपनी बहन के साथ अमित को देखकर विवाद किया और मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान अमित का सिर पीछे की दीवार से टकराने से खून के निशान लगे। अमित वहां से भागने का प्रयास कर रहा था, तभी बजरंग सिंह ने पास पड़े छोटे फावड़े/रापा से उसके सिर और छाती पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

शव को झुरमुट में छिपाया, फिर दूसरी जगह ले जाकर रखा
पुलिस के अनुसार हत्या के बाद बजरंग सिंह ने शव को घर के पीछे स्थित बाड़ी में झुरमुट के नीचे छिपा दिया। उस समय गांव में चोरी की सूचना के चलते डायल-112 की टीम मौजूद थी और ग्रामीण भी जाग रहे थे। ऐसे में शव को उसी रात दूसरी जगह ले जाना आरोपियों के लिए जोखिम भरा था।
पुलिस का दावा है कि घटना की पूरी जानकारी संतोषी सिंह को थी और उसने शव छिपाने में अपने भाई की मदद की।अगले दिन बजरंग सिंह ने अपने बड़े भाई पप्पू सिंह को घटना की जानकारी दी। इसके बाद दोनों ने पुलिस और मृतक के परिजनों को गुमराह करने के लिए अमित को तलाशने का नाटक किया। परिजनों के साथ थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।

मध्यरात्रि में शव को दूसरी जगह रखा
पुलिस के मुताबिक 28 जून की मध्यरात्रि करीब 12 बजे मौका देखकर बजरंग और पप्पू ने शव को बाड़ी से निकालकर गांव के बीच एक अन्य स्थान पर रख दिया, ताकि पुलिस का संदेह उन पर न जाए।
29 जून को शव मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

CDR से लेकर टावर डंप और आधुनिक तकनीक से जांच
जिला पुलिस कप्तान के निर्देश पर मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई। पुलिस टीम ने CDR, IPDR, टावर डंप, GPS, CCTV फुटेज और संदिग्धों के घटना के समय के लोकेशन सहित कई तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण किया।
घटना के बाद आरोपियों के व्यवहार, उनके बयानों में बार-बार बदलाव और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया।पुलिस के अनुसार मामले की जांच में ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया गया।

ट्रैकर डॉग विमला की भूमिका अहम
मामले की जांच में बिलासपुर से लाई गई सीनियर ट्रैकर डॉग विमला की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। उसके द्वारा दिए गए लीड को पुलिस ने अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जोड़कर जांच को आगे बढ़ाया।
लगातार पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों से दोबारा पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हत्या की घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की।

हत्या में प्रयुक्त फावड़ा और सीढ़ी बरामद
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया छोटा फावड़ा/रापा तथा शव को दूसरी जगह ले जाने में उपयोग की गई छोटी सीढ़ी बरामद की है।
पुलिस ने तीनों आरोपियों बजरंग सिंह, संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। इनमें संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि बजरंग सिंह का पुलिस रिमांड लिया गया है। पुलिस के अनुसार आगे फॉरेंसिक एवं तकनीकी जांच की कार्रवाई की जाएगी।
करीब दो महीने से पुलिस के लिए चुनौती बनी इस हत्या की गुत्थी के सुलझने के बाद मामले में पुलिस की जांच और तकनीकी साक्ष्यों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।

