जांजगीर-चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) जांजगीर-चांपा परिवार परामर्श केंद्र जैसी संवेदनशील संस्था में नियुक्ति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि ऐसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किसी व्यक्ति को सौंपने से पहले उसके अनुभव, सामाजिक कार्य, परामर्श क्षमता और चयन प्रक्रिया का समुचित मूल्यांकन किया गया था या नहीं।
कोसमंदा निवासी मुस्कान प्रधान उस समय चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने कथित रूप से नशे की हालत में पहुंचे दूल्हे से विवाह करने से इनकार कर दिया था। इस घटना को महिला आत्मसम्मान और नशामुक्त समाज के संदेश के रूप में व्यापक सराहना मिली। बाद में जांजगीर-चांपा पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करते हुए परिवार परामर्श केंद्र में महिला काउंसलर की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
अब उसी युवक से उनके विवाह की खबर सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि यह विवाह उनका पूर्णतः निजी और कानूनी अधिकार है, लेकिन जिस घटना के आधार पर उन्हें सार्वजनिक रूप से महिला सशक्तिकरण का प्रतीक मानते हुए यह जिम्मेदारी दी गई थी, उस निर्णय की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य प्रश्न यह है कि क्या किसी वायरल घटना के आधार पर तत्काल ऐसी संवेदनशील जिम्मेदारी देना उचित था? क्या नियुक्ति से पहले उनके सामाजिक योगदान, अनुभव और परामर्श कौशल का निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन किया गया था? यदि नहीं, तो भविष्य में ऐसी नियुक्तियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
परिवार परामर्श केंद्र का उद्देश्य केवल सलाह देना नहीं, बल्कि वैवाहिक विवादों का समाधान, टूटते परिवारों को जोड़ना और समाज में विश्वास कायम रखना है। ऐसे में यहां नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति की योग्यता, निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहना आवश्यक है।
सामाजिक स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि शासन और पुलिस प्रशासन नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कराए। यदि समीक्षा में चयन निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। वहीं यदि नियुक्ति पूरी तरह नियमसम्मत हो, तो विभाग आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर सभी प्रकार के भ्रम को समाप्त करे।
यह मामला किसी व्यक्ति के निजी जीवन से अधिक सरकारी संस्थाओं की निर्णय प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन द्वारा शीघ्र आधिकारिक स्पष्टीकरण या आवश्यक होने पर स्वतंत्र समीक्षा कराए जाने की मांग की जा रही है, ताकि परिवार परामर्श केंद्र जैसी महत्वपूर्ण संस्था की विश्वसनीयता और जनविश्वास कायम रह सके।




