रायपुर/दुर्ग (सलवा जुडुम मीडिया) छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी खुशबू को अपने अद्भुत पंडवानी गायन के माध्यम से विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने वाली, लोक कला, लोक गाथा और लोक संस्कृति की सशक्त पर्याय पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई पंचतत्व में विलीन हो गई हैं। उनके निधन पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव व प्रख्यात फिल्म राइटर गिरधारी यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि अर्पित की है।
श्री यादव ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई का देहावसान छत्तीसगढ़ी बोली, भाखा और लोक कला के क्षेत्र के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसके खालीपन को कभी भरा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “बालपन से ही पंडवानी विद्या के माध्यम से अपनी असाधारण प्रतिभा को विश्व विख्यात बनाने वाली तीजन बाई का हमारे बीच से जाना उच्च स्तर की भारतीय प्रतिभा का खो जाना है। उनकी यह कमी हमेशा खलेगी, लेकिन उनकी प्रतिभा की छाया सदैव लोकगाथा के साधकों के लिए पथ प्रदर्शन का कार्य करती रहेगी।
“गिरधारी यादव ने डॉ. तीजन बाई के जीवन संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि 8 अगस्त 1956 से लेकर 5 जुलाई 2026 तक की उनकी जीवन यात्रा अनेकों कठिनाइयों, सामाजिक बाधाओं और कड़ी मेहनत से भरी रही है। विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए उन्होंने कला जगत में अपना एक अमिट स्थान बनाया।
वे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, छत्तीसगढ़ रत्न, कबीर सम्मान, पद्म श्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ जैसे उच्च पुरस्कारों से सम्मानित थीं। श्री यादव ने कहा कि तीजन बाई माता सरस्वती की सच्ची पुत्री थीं, जिनकी बुलंद आवाज में लोक कला और लोक गाथा का सच्चा पर्याय छुपा हुआ था। ऐसी महान प्रतिभाओं का जन्म सदियों में केवल एक बार ही होता है।
उन्होंने अंत में कहा कि तीजन बाई भले ही पंचतत्व में विलीन हो गई हैं, लेकिन उनकी स्मृतियां छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक गाथा और लोक संस्कृति में सदैव विराजमान रहेंगी। वे अपनी कला और बुलंद आवाज के माध्यम से संस्कृति प्रेमियों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगी।




