चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) 23 सितंबर 1983 को चांपा नगर में शुरू हुआ जनांदोलन और उसके अगले दिन 24 सितंबर को हुआ पुलिस लाठीचार्ज व गोलीकांड आज भी नगर के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में याद किया जाता है। पानी, बिजली और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर नागरिक लंबे समय से प्रशासन के सामने अपनी मांगें रख रहे थे।

बताया जाता है कि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से छात्रों और युवाओं में आक्रोश बढ़ता गया। आंदोलन के दौरान तत्कालीन नगरपालिका अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। इसके बाद कई आंदोलनकारियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
24 सितंबर को कुछ युवाओं और छात्रों की गिरफ्तारी की खबर फैलने के बाद नगर में विरोध तेज हो गया। स्कूल-कॉलेज बंद कराकर नागरिकों ने थाने का घेराव किया और गिरफ्तार युवाओं की रिहाई की मांग की। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और इसके बाद लाठीचार्ज तथा गोलीचालन किया।

गोलीचालन की घटना में छात्र राजकरण दुग्गड़ की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज हुए और उन्हें वर्षों तक न्यायालय के चक्कर लगाने पड़े।इस घटना के बाद 24 सितंबर का दिन चांपा में लंबे समय तक काला दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। नगरवासियों ने राजकरण दुग्गड़ को आंदोलन में जान गंवाने वाले छात्र के रूप में स्मरण करते हुए उनकी प्रतिमा स्थापित की। आज भी 24 सितंबर को उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है।

43 वर्ष बाद भी 1983 का यह जनांदोलन और गोलीकांड चांपा की सामूहिक स्मृति में दर्ज है और हर वर्ष 24 सितंबर को राजकरण दुग्गड़ को श्रद्धांजलि देकर उस घटना को याद किया जाता है।




