आत्म उन्नति एवं आत्मदीप महोत्सव में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग का दिया संदेश, दीप प्रज्ज्वलन कर आत्मज्योति जागृत करने का लिया संकल्प
मुनुन्द जांजगीर, (सलवा जुडूम मीडिया) 6 नवंबर 2026। जीवन को सुखमय, शांतिपूर्ण और श्रेष्ठ बनाने के लिए उसमें दिव्य गुणों एवं आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। परमात्मा से प्राप्त यह जीवन अनमोल उपहार है। इसके भीतर प्रेम, शांति, खुशी, पवित्रता और आनंद जैसे दिव्य गुण पहले से ही समाहित हैं। आवश्यकता केवल इन गुणों को पहचानकर जागृत करने की है। यह विचार ब्रह्माकुमारीज संस्थान के मुख्यालय माउंट आबू से पधारे राजयोगी भानू भाई ने व्यक्त किए।

वे शुक्रवार को ब्रह्माकुमारीज संस्था के स्थानीय सेवाकेंद्र होली हंस सरोवर, मुनुन्द में आयोजित आत्म उन्नति एवं आत्मदीप महोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

राजयोगी भानू भाई ने कहा कि देवत्व और असुरत्व दोनों हमारे भीतर मौजूद हैं। देवत्व के संस्कार आत्मा के मूल एवं अविनाशी गुण हैं, जबकि असुरत्व बाहरी परिस्थितियों और नकारात्मक विचारों के कारण उत्पन्न होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम अपना फोटो खिंचवाते हैं तो हमेशा मुस्कुराता हुआ और प्रसन्न चेहरा चाहते हैं, गुस्से वाला नहीं। इसका कारण है कि खुशी आत्मा का स्वाभाविक गुण है, जबकि क्रोध के लिए हम किसी व्यक्ति या परिस्थिति को जिम्मेदार ठहराते हैं। इसलिए हमें अपने मूल स्वरूप को पहचानकर सकारात्मक जीवनशैली अपनानी चाहिए।

उन्होंने छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया की सुंदर व्याख्या करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों की विशेषता उनकी सरलता, सहजता और शांतिप्रिय स्वभाव है। जिस प्रकार भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, उसी प्रकार यहां के लोग भी अपनी सरलता और सहजता के लिए पहचाने जाते हैं। शांति आत्मा का मूल गुण है, जिसे जीवन में धारण करना आवश्यक है।

बिलासपुर से पधारे प्रशांत भाई ने मेडिटेशन एवं म्यूजिक के माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि निराशाजनक जीवनशैली को आशावादी बनाना और अपने जीवन को सुखद बनाना व्यक्ति के स्वयं के हाथ में है। इसके लिए दूसरों को दोष देने के बजाय व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर राजयोग मेडिटेशन को अपनाना चाहिए।
जांजगीर के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कमलेश सिंह ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत अनमोल है। इसे व्यर्थ गंवाने के बजाय अच्छे कर्मों, सेवा और समाजहित के कार्यों में लगाना चाहिए। श्रेष्ठ कर्म ही व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाते हैं।

बी.के. सरणजीत भाई ने कहा कि भक्ति का मुख्य उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति करना है। जब व्यक्ति को भगवान की पहचान हो जाती है, तब उसे अपनी मनमत छोड़कर परमात्मा की श्रीमत और आज्ञा के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान से जुड़कर लाखों लोग आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग के माध्यम से श्रेष्ठ जीवन जी रहे हैं।

जांजगीर क्षेत्र की ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र संचालिका बी.के. चन्द्रिका दीदी ने कहा कि वर्तमान समय युग परिवर्तन की संधि बेला है। आज तनावमुक्त और सकारात्मक जीवन जीना प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता बन गई है। यह आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग ध्यान के अभ्यास से संभव है।
उन्होंने दीपावली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दीपावली केवल पटाखे फोड़ने और दीपक जलाकर खुशियां मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर ज्ञान का दीप जलाने और आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने का भी अवसर है। जीवन में उमंग, उत्साह और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आत्मदीप को जागृत करना चाहिए।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ कु. वाणी द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुआ। कु. तरु ने भी अपनी सुंदर प्रस्तुति दी। ब्रह्माकुमारी खुशबू ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया।
दीपावली के प्रथम दिवस के अवसर पर परिसर में मां लक्ष्मी की आकर्षक रंगोली सजाई गई थी। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर ज्ञान की ज्योति को निरंतर प्रज्वलित रखने का संकल्प लिया। उपस्थित श्रोताओं ने भी दीप प्रज्ज्वलन कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संदेश ग्रहण किया।

कार्यक्रम के अंत में दीपावली पर्व के उपलक्ष्य में सभी उपस्थितजनों को प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक वातावरण, सकारात्मक चिंतन और आत्मिक उन्नति का संदेश देखने को मिला।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन ब्रह्माकुमार फिरत भाई ने किया।





