कोरबा (सलवा जुडुम मीडिया) प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में गरीबों के सिर से छत छीनकर लाखों रुपये डकारने वाले सिंडिकेट पर प्रशासन और कानून का बड़ा चाबुक चला है। जनपद पंचायत कोरबा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत तिलकेजा में हुए बहुचर्चित आवास घोटाले में आरटीआई कार्यकर्ता व पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू के दस्तावेजी साक्ष्यों और निरंतर संघर्ष के बाद पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आया। जांच में वित्तीय अनियमितता व संगठित भ्रष्टाचार प्रमाणित होने के बाद जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन IAS ने कड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में जहां तकनीकी सहायक को तत्काल बर्खास्त और पंचायत सचिव को निलंबित किया गया है, वहीं उरगा थाने में 6 नामजद अधिकारियों-कर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता BNS की गैर-जमानती व गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

इस पूरे फर्जीवाड़े की नींव पर से पर्दा शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने उठाया। जितेंद्र साहू ने पूरे मामले की तह तक जाकर पुख्ता साक्ष्य जुटाए और कलेक्टर जिला दंडाधिकारी एवं जिला पंचायत सीईओ को नामजद व विस्तृत शिकायती प्रतिवेदन सौंपा।दस्तावेजों में सामने आई गबन की पूरी कहानी ग्राम सभा का फैसला बदला जी हाँ, 18 जुलाई 2024 को तिलकेजा में आयोजित विशेष ग्राम सभा में 214 नामों के सार्वजनिक वाचन के दौरान शासकीय सेवकों, पक्के मकान धारकों व पूर्व लाभान्वित 66 अपात्रों को विधिवत सूची से खारिज कर दिया गया था।

सरपंच तेरस बाई कंवर, सरपंच-पति देवमूरत कंवर और तत्कालीन पंचायत सचिव नवीता दुबे ने सांठगांठ कर 14 अप्रैल 2026 को कूट-रचित फर्जी कार्यवाही पंजी तैयार की जिसमें ग्राम सभा से खारिज सभी 66 अपात्रों को नियम विरुद्ध तरीके से पात्र दर्शा दिया गया।

पोर्टल पर अवैध प्रविष्टि व बंदरबांट कैसे किए 23 जून 2026 को पीएम आवास पोर्टल पर फर्जी प्रविष्टियां की गईं और लगभग 48 से अधिक अपात्रों, अन्य परिवारों व यहां तक कि मृतकों के खातों में 40,000 रुपए प्रति हितग्राही की दर से पहली किश्त जारी कर लाखों रुपये का गबन कर लिया गया।

जितेंद्र साहू की शिकायत पर जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने जब रिकॉर्ड तलब किए, तब आरोपियों के पसीने छूट गए, उप संचालक पंचायत द्वारा 11 अगस्त 2026 को पत्र जारी कर 13 अगस्त को सभी 48 खातों की पासबुक, पहचान पत्र व मृत्यु रजिस्टर सहित पेश होने को कहा गया, लेकिन सचिव उपस्थित नहीं हुईं। नोटिस का नहीं दिया जवाब जिसके बाद 18 अगस्त 2026 को 3 दिन में स्पष्टीकरण देने का अंतिम अवसर दिया गया, फिर भी कोई जवाब नहीं आया।

जांच में घोर असहयोग और छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने सचिव नवीता दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जनपद मुख्यालय अटैच कर दिया।

बर्खास्तगी और पुलिसिया शिकंजा उरगा थाने में अपराध क्रमांक 0536/2026 दर्ज
जिला स्तरीय जांच समिति के प्रतिवेदन में असंबद्ध व्यक्तियों और मृतकों के खातों में शासकीय राशि अंतरित करने का आरोप सिद्ध होने के बाद प्रशासन ने दोतरफा कड़ा प्रहार किया, कार्यालय जिला पंचायत कोरबा के आदेश क्र./I/395346/2026 दिनांक 30-09-2026 के तहत छत्तीसगढ़ सिविल सेवा संविदा नियुक्ति नियम, 2012 के तहत तकनीकी सहायक अभिषेक चौरसिया को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया।

जिला समन्वयक PMAY-G आशीष कुमार की लिखित शिकायत पर थाना उरगा में भारतीय न्याय संहिता BNS 2023 की धारा 318(4) धोखाधड़ी, 316(5) लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग और 3(5) समान आशय के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
नामजद आरोपी मे देवानंद श्रीवास (विकासखंड समन्वयक)अभिषेक चौरसिया (तकनीकी सहायक) ध्रुव कुमार साहू (डाटा एंट्री ऑपरेटर)धनंजय पटेल (कंप्यूटर ऑपरेटर) सुश्री रामेश्वरी कंवर (आवास मित्र) श्रीमती नवीता/नमीता दुबे (पंचायत सचिव) एवं अन्य शामिल हैँ l

सिंडिकेट पर चोट अन्य पंचायतों में भी हलचलतिलकेजा का यह मामला केवल चंद किश्तों के हेरफेर का नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों के उस गठजोड़ का पर्दाफाश है जो गरीबों के हक पर डाका डाल रहा था। आरटीआई कार्यकर्ता व पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू की सजगता ने साबित कर दिया कि ठोस साक्ष्यों के आगे भ्रष्ट तंत्र ज्यादा दिन टिक नहीं सकता।
चर्चा है कि इस गिरोह के तार कुदुरमाल पंचायत से भी जुड़े हैं, जहां इसी तरह के फर्जीवाड़े की सुगबुगाहट है। बहरहाल तिलकेजा मामले में बर्खास्तगी, निलंबन और नामजद एफआईआर ने जिले भर के भ्रष्ट बिचौलियों व लापरवाह अफसरों में हड़कंप मचा दिया है।


