राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज तालाब की जमीन को सहेजने याचिकाकर्ताओं ने लगाई थी गुहार,,,,,
सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों का हवाला देकर जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने सुनाया फैसला
चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) बिलासपुर उच्च न्यायालय ने चांपा नगर के लच्छी बंध तालाब को अवैध रूप से पाटने और व्यावसायिक दुकान निर्माण कार्य करने के प्रयास को लेकर एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। माननीय न्यायमूर्ति श्री अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांजगीर-चांपा कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वे पूरे मामले की विधिवत जांच करें यदि याचिकाकर्ताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सभी पक्षों को सुनवाई का मौका देते हुए कानून के तहत तत्काल उचित कार्रवाई की जाए।

कलेक्टर ने नहीं की कार्रवाई, तो खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
मिली जानकारी के अनुसार, चांपा के थानापारा निवासी रवीन्द्र कुमार मासुलकर और चौपाटी निवासी विवेक शर्मा ने हाईकोर्ट में रिट याचिका (WPC No. 225 of 2023) दायर की थी। याचिकाकर्ताओं के वकील श्री अमित कुमार ने कोर्ट को बताया कि चांपा में स्थित खसरा नंबर 811 , 812 की जमीन राजस्व रिकॉर्ड ‘वाजिब-उल-अर्ज’ में तालाब और छोटे तालाब (डबरी) के रूप में दर्ज है। इस तालाब को एक स्थानीय रसूखदार (प्रतिवादी कुँवर भिवेन्द्र बहादुर सिंह) द्वारा अवैध रूप से भरकर निर्माण कार्य करने का प्रयास किया जा रहा था। याचिकाकर्ताओं ने इसकी शिकायत पहले जिला कलेक्टर से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

जल निकायों का संरक्षण सर्वोपरि: न्यायालय
सुनवाई के दौरान राज्य शासन और प्रतिवादी पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जल निकायों और तालाबों का संरक्षण सबसे पहली प्राथमिकता है। न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के प्रसिद्ध फैसले ‘जितेंद्र सिंह बनाम पर्यावरण मंत्रालय और अन्य (2020)’ तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के जल संरक्षण संबंधी कड़े दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि दर्ज उद्देश्य (तालाब) के अलावा इस जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य काम के लिए कानूनन नहीं किया जा सकता।

60 दिनों के भीतर कलेक्टर को पारित करना होगा तर्कपूर्ण आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे आदेश की कॉपी मिलने के 10 दिनों के भीतर कलेक्टर जांजगीर-चांपा के समक्ष एक विस्तृत आवेदन और सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें। आवेदन प्राप्त होने के बाद कलेक्टर को अगले 60 दिनों के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच कर, सभी पक्षों को सुनकर एक तर्कपूर्ण आदेश पारित करना होगा। कोर्ट के इस आदेश के बाद नगर में सरकारी जमीनों और तालाबों पर नजर गड़ाए भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।






