कोरबा (सलवा जुडूम मीडिया) सरकारी रिकॉर्ड्स कानून की नज़र में संपत्ति होते हैं जी हाँ जिनका गायब होना साधारण लापरवाही नहीं बल्कि सीधा आपराधिक कृत्य है। इसके बावजूद ज़िला परिवहन कार्यालय RTO कोरबा में नियमों को दरकिनार कर गंभीर अनियमितताओं को दबाने का खेल जारी है।

फ़र्ज़ीवाड़े पर गुमशुदगी का पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है l मृत व्यक्ति के नाम पर वाहन CG12AZ-2969 ट्रांसफर के संवेदनशील मामले में शाखा प्रभारी की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। जब RTI कार्यकर्ता जितेन्द्र कुमार साहू ने इस जांच की मूल नस्ती माँगी तो जनसूचना अधिकारी ने पत्र क्रमांक 429 जारी कर नस्ती अप्राप्य एवं खोजबीन जारी का औपचारिक हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया।

प्रशासनिक शिथिलता एवं विधिक प्रश्न उठना लाजमी है,अमानत में ख़यानत पर चुप्पी क्यों? दस्तावेज़ गायब होने के बावजूद ज़िम्मेदार अधिकारियों ने अब तक स्थानीय थाने में FIR दर्ज क्यों नहीं कराई?
कयास लगाए जा रहे है यह सरंक्षण का खेल का एक कृत्य है, क्या नस्ती का लापता होना दोषी कर्मचारियों को कानूनी शिकंजे से बचाने की सोची-समझी रणनीति है?

RTI अधिनियम के उल्लंघन और प्रशासनिक हठधर्मिता के विरुद्ध आवेदक ने अपर कलेक्टर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत की है। अब देखना यह है कि ज़िला प्रशासन दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के कड़े निर्देश देता है या यह प्रकरण भी फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा।
कागज़ नहीं आर्थिक लाभ अर्जित करने के बाद किए गए कृत्य को लापता करने की कोशिश की जा रही है l अगर आम जनता से कागज़ गुम हो जाए तो RTO के चक्कर कटवाए जाते हैं, लेकिन जब खुद विभाग की नीयत पर दाग लगे तो फाइल अप्राप्य बता दी जाती है। प्रथम अपीलीय अधिकारी का रुख अब यह तय करेगा कि कोरबा में कानून का राज चलेगा या रसूखदारों के मैनेजमेंट का l


