*फर्जी मुख्तियारनामा और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे 5 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री*
*चांपा पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला, आरोपियों की तलाश और विवेचना जारी*
चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) थाना चांपा क्षेत्र के अंतर्गत 70 साल पुरानी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। प्रार्थी पुरुषोत्तम सोनी की शिकायत और राजस्व विभाग की जांच के बाद चांपा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और कूटरचना का मामला दर्ज कर लिया है। इस पूरे घोटाले में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने वाले राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
1954 से दर्ज था रिकॉर्ड, 80 के दशक में बदला नाम
शिकायत के मुताबिक, ग्राम चांपा में स्थित खसरा नंबर 958 (रकबा 5 डिसमिल) जमीन वर्ष 1954-55 से प्रार्थी के दादा गोकुल सोनी के नाम पर दर्ज थी। लेकिन वर्ष 1985-86 के दौरान तहसील कार्यालय के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों से सांठगांठ कर राजस्व रिकॉर्ड में भारी हेरफेर की गई। शासकीय दस्तावेजों में कांट-छांट कर इस कीमती जमीन को फर्जी तरीके से गोकुल भोई (निवासी मल्दामाल, जिला महासमुंद) के नाम पर दर्ज कर दिया गया।
महासमुंद जाकर रची साजिश, 19 लाख का फर्जी चेक थमाया
इस फर्जी इंद्राज का फायदा उठाने के लिए संतोष यादव (निवासी जगदल्ला, चांपा) और संदीप ठाकुर (निवासी जांजगीर) ने मिलकर एक गहरी साजिश रची। नवंबर-दिसंबर 2025 में ये दोनों आरोपी महासमुंद पहुंचे और सीधे गोकुल भोई से संपर्क किया। आरोपियों ने उसे झांसा देते हुए कहा कि “चांपा में तुम्हारी 15 डिसमिल जमीन है, जिसके बदले तुम्हें 19 लाख रुपये का चेक मिलेगा।” गोकुल भोई के मना करने के बावजूद आरोपियों ने दबाव बनाया और 12 जनवरी 2026 को उसे सारंगढ़ उप पंजीयक कार्यालय ले जाकर अपने पक्ष में फर्जी मुख्तियारनामा (पावर ऑफ अटॉर्नी) तैयार करवा लिया।
करोड़ों की जमीन को 77 लाख में बेचा, चेक भी हुआ बाउंस
इस फर्जी मुख्तियारनामे के दम पर 19 फरवरी 2026 को संतोष यादव ने उक्त 5 डिसमिल जमीन को संदीप ठाकुर के नाम पर 77 लाख 79 हजार 900 रुपये में रजिस्ट्री कर दिया। इस सौदे के एवज में संदीप ठाकुर ने गोकुल भोई के नाम पर 19,22,201 रुपये का एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का चेक जारी किया। हालांकि, जब इस चेक को बैंक में लगाया गया तो यह क्लियर नहीं हुआ यानी चेक पूरी तरह फर्जी और बाउंस निकला।
एसडीएम की जांच में खुली पोल: उम्र और सरकारी रिकॉर्ड दोनों में जालसाजी
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चांपा की आधिकारिक जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े की परत दर परत पोल खुल गई:
- उम्र में हेरफेर: उप पंजीयक कार्यालय में गोकुल भोई के जो आधार और पैन कार्ड जमा किए गए थे, उनमें उसकी असली जन्मतिथि 01.01.1961 थी। आरोपियों ने चालाकी से इसमें छेड़छाड़ कर इसे 01.01.1948 कर दिया ताकि उसे जमीन का पुराना मालिक साबित किया जा सके।
- शासकीय रिकॉर्ड में कटिंग: एसडीएम की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 26 नवंबर 1957 की बिक्री प्रविष्टि और वर्ष 1957-58 की संशोधन पंजी के पृष्ठ क्रमांक 40-41 में बकायदा ब्लेड से कटिंग और मिटाकर फर्जी क्रमांक 207 दर्ज किया गया था।
- पीड़ित का बयान: जब गोकुल भोई से पूछताछ की गई तो उसने साफ कहा कि वह अपने जीवन में कभी चांपा आया ही नहीं है और न ही चांपा में उसकी कोई जमीन है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
प्रशासनिक जांच में आरोपियों द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर छल, कपट और धोखाधड़ी से करोड़ों की संपत्ति हड़पने का अपराध पूरी तरह सिद्ध पाया गया है। चांपा पुलिस ने आरोपी संदीप ठाकुर, संतोष यादव और इस साजिश में शामिल अन्य मददगारों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीकृत कर लिया है। पुलिस मामले की गहराई से विवेचना कर रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जा सकती है।




