चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) 9 सितंबर को मेहंदीपारा स्टेशन रोड, चांपा निवासी शिव सहिस को अवैध शराब के प्रकरण में पुलिस द्वारा चांपा थाना लाया गया था। बताया जा रहा है कि रात में उसकी तबीयत खराब होने के बाद उसे बीडीएम अस्पताल ले जाया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर दूसरे दिन सुबह जिला अस्पताल ले जाने पर युवक को मृत घोषित कर दिया गया।

शिव सहिस की मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने चांपा थाने का घेराव कर दिया। इस दौरान भीम आर्मी संगठन ने भी अपना समर्थन दिया। स्थिति को देखते हुए चांपा थाने को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और आसपास के जिलों से भी पुलिस बल बुलाया गया।

इतनी बड़ी घटना के बाद जांजगीर-चांपा के कलेक्टर और एसपी के थाना नहीं पहुंचने को लेकर भी जनचर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं जिला न्यायाधीश द्वारा चांपा थाना पहुंचकर मौके का अवलोकन किए जाने की सराहना की जा रही है। दूसरी ओर, पुलिस पर लगे आरोपों और युवक की मौत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप
गौरतलब है कि चांपा थाना इन दिनों निर्दोष लोगों और रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचने वालों से कथित उगाही को लेकर भी चर्चा में है। आरोप है कि थाने के चार-पांच सिपाही आसपास अवैध शराब बेचने और नशीली दवाइयों का कारोबार करने वालों से लगातार अवैध वसूली करते हैं। पैसा नहीं देने पर मारपीट कर मामला बनाए जाने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

इसी तरह इस मामले में भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या शिव सहिस के साथ भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा था? क्या पुलिस की कथित मार को सहन नहीं कर पाने के कारण उसकी मौत हुई? हालांकि यह पूरा मामला जांच का विषय है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई, लेकिन सवाल बरकरार
जनता और भीम आर्मी जैसे संगठनों के विरोध के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस विभाग पर लगे आरोपों के बीच कार्रवाई की गई है। इस मामले में ईश्वरी राठौर, जिसे मामले का मुख्य दोषी माना जा रहा है, उसे निलंबित किया गया है। वहीं अशोक वैष्णव, थाना प्रभारी तथा बाबूलाल दिवाकर एएसआई को लाइन अटैच किया गया है।

इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आने वाले समय में जांच रिपोर्ट में पुलिस कस्टडी के दौरान पुलिस की मारपीट से शिव सहिस की मौत की पुष्टि होती है, तो क्या संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होगा?
पांच छोटे बच्चों के भविष्य का क्या होगा?
शिव सहिस अपने पीछे पांच छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ गया है। परिवार की ओर से बच्चों के भविष्य को देखते हुए 50 लाख रुपये के मुआवजे और एक सरकारी नौकरी की मांग की गई है। अब सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन द्वारा परिवार की इन मांगों को स्वीकार किया जाएगा?इसी बीच एक इकरारनामा सामने आने के बाद मामला और भी चर्चा में आ गया है। इसमें थाना प्रभारी अशोक वैष्णव द्वारा 50 रुपये के स्टांप पेपर पर शिव सहिस के परिवार को बच्चों की शिक्षा, भरण-पोषण के लिए जीवनभर प्रतिमाह 25 हजार रुपये देने का इकरार किए जाने की बात सामने आई है।

यह इकरारनामा भी कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर यह इकरार शासन की ओर से है या व्यक्तिगत रूप से थाना प्रभारी की ओर से? साथ ही 50 रुपये के स्टांप पर किए गए इस इकरारनामे का आगे चलकर कितना और क्या कानूनी महत्व होगा, यह भी देखने वाली बात होगी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल
कुल मिलाकर चांपा थाने में घटित यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आरोप है कि पुलिस की मारपीट के कई मामलों में आरोपी, अपराधी या फिर बेगुनाह व्यक्ति पुलिस के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ पाता और उसकी मार सहकर चुप रह जाता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि मानव अधिकार जैसी संस्थाओं और देश में लागू कानून एवं नियमों के बावजूद क्या पुलिस को खाकी वर्दी इसलिए मिली है कि वह जिसकी चाहे पिटाई करे या उसकी जान ले ले? यह सवाल आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसका जवाब आने वाले समय में पुलिस और जांच एजेंसियों को देना होगा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिव सहिस की मौत कैसे हुई? इसका वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई की स्थिति भी साफ हो सकेगी। बताया जा रहा है कि मामला जिला न्यायाधीश की निगरानी में है।
शिव सहिस की मौत से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या तस्वीर सामने लाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सलवा जुडूम मीडिया इस मामले से जुड़ी आगे की खबरों को भी प्रमुखता से सामने लाता रहेगा।





