चांपा (सलवा जुडूम मीडिया) चांपा नगर थाना के समीप मुख्य मार्ग किनारे स्थित लगभग 150 वर्ष पुराने जन-निस्तारी लच्छीबंध तालाब पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप है कि प्रशासन द्वारा जारी किए गए स्थगन आदेशों के बावजूद तालाब क्षेत्र में निर्माण कार्य जारी है और अब नई दुकानों के निर्माण के साथ टाइल्स व मार्बल लगाकर व्यावसायिक संचालन की तैयारी भी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार लच्छीबंध तालाब का निर्माण तत्कालीन राज परिवार ने जन-निस्तारी एवं जनहित के उद्देश्य से कराया था। बताया जाता है कि सीलिंग के समय यह तालाब शासन के अधीन नहीं आया और निजी तालाब के रूप में पूर्व राज परिवार के नाम दर्ज रहा। इसी स्थिति का लाभ उठाकर कथित भूमाफियाओं द्वारा तालाब के एक हिस्से को पाटकर लगभग 150 फीट लंबाई और 40 फीट चौड़ाई में करीब 10 दुकानों का व्यावसायिक परिसर निर्मित किए जाने का आरोप लगाया गया है।

इस मामले में चांपा के समाजसेवियों द्वारा तहसीलदार एवं एसडीएम से शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर तहसीलदार ने 11 नवंबर 2025 को निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी किया। आरोप है कि आदेश के बाद भी निर्माण नहीं रुका, जिसके बाद 27 फरवरी 2026 को पुलिस कार्रवाई के लिए थाना को पत्र भेजा गया। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने की बात कही जा रही है।

बाद में शिकायतकर्ता गिरधारी यादव, रविन्द्र मासूलकर, मुकेश बोहरा, जीत बहादुर साहू एवं संतू दास महंत की शिकायत पर मामला अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के समक्ष पहुंचा। एसडीएम ने 16 मार्च 2026 को पुनः निर्माण कार्य रोकने के निर्देश देते हुए स्थगन आदेश जारी किया। आरोप है कि इसके बाद भी निर्माण नहीं रुका और अब दो नई दुकानों का निर्माण कर उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसीलदार, एसडीएम और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद यदि अवैध निर्माण जारी रहता है, तो इससे प्रशासनिक आदेशों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन के समक्ष चुनौती बन गया है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर जल स्रोतों—जैसे तालाब, पोखर, नदी, नाला और कुओं—के मूल स्वरूप को संरक्षित रखने पर बल दिया गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन सिद्धांतों के अनुरूप लच्छीबंध तालाब के मामले में भी प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में संबंधित निर्माणकर्ताओं और प्रशासन का पक्ष सामने आना शेष है। यदि प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


