रायपुर (तूता धरना स्थल) सलवा जुडूम मीडिया
स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष महोदय और उनकी पूरी टीम ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। तूता धरना स्थल पर आयोजित 4 और 5 तारीख के दो दिवसीय धरने के बाद, संघ के समस्त पदाधिकारियों ने सम्माननीय तहसीलदार महोदय जी को मुख्यमंत्री के नाम अपना 5 सूत्रीय मांग पत्र और ज्ञापन सौंपा। अतः हमारे संघ की ओर से निम्नलिखित माँगें आपके समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं-
1. मध्यप्रदेश की तर्ज पर संविदा नियम लागू किया जाए: मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संविदा कर्मचारियों के हित में लागू किए गए नियमों एवं सुविधाओं की भांति छत्तीसगढ़ में भी समान नियम लागू कर संविदा कर्मचारियों को न्याय दिया जाए।
2. कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति व्यवस्था समाप्त कर समस्त शिक्षक एवं कर्मचारियों सहित विद्यालय को शिक्षा विभाग में संविलयन किया जाए: संगठन की मांग है कि समस्त स्वामी आत्मानंद विद्यालयों को सीधे शिक्षा विभाग के अधीन किया जाए एवं समस्त संविदा शिक्षक एवं कर्मचारियों को शिक्षा विभाग में संविलयन किया जाय ।
3. वार्षिक वेतन वृद्धि तथा वेतन विसंगतियों के निराकरण संबंधी :समस्त संविदा शिक्षक एवं कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष नियमानुसार वार्षिक वेतन वृद्धि तथा साथ ही डीएमएफ से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में भी सुधार हो। राजपत्र 2013 अनुसार ग्रंथपालों को पुनः शिक्षक ग्रंथपाल (लेवल-8) पद दिया जाए।
4. न्यूनतम 50 लाख रुपये का बीमा सुरक्षा प्रदान किया जाए: स्वामी आत्मानंद के संविदा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ अप्रिय घटना की स्थिति में उनके परिवारों की सुरक्षा हेतु कम से कम ₹50 लाख का बीमा लागू किया जाए।
5. PF कटौती एवं सेवा सुरक्षा लागू की जाए: स्वामी आत्मानंद के संविदा कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (PF) की नियमित कटौती सुनिश्चित करते हुए सेवा सुरक्षा, सेवा अवधि संरक्षण एवं भविष्य सुरक्षित करने हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए।

इस सफल आयोजन और एकजुटता के लिए संघ के शीर्ष नेतृत्व ने उपस्थित समस्त पदाधिकारियों और कर्मचारियों को हार्दिक-हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। कार्यक्रम के दौरान “जय सजेश, विजय सजेश” के नारों से पूरा धरना स्थल गूंज उठा।
15 अगस्त की समय-सीमा, वरना उग्र आंदोलन
संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सरकार 15 अगस्त तक उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

आगामी रणनीति की मुख्य बातें:
चरणबद्ध आंदोलन: मांगें पूरी न होने पर आगे 7 दिवसीय और फिर 15 दिवसीय आंदोलन की शुरुआत होगी।
आर-पार की लड़ाई: यदि फिर भी सुनवाई नहीं हुई, तो समस्त कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल और आंदोलन पर चले जाएंगे।
कामकाज ठप होने की चेतावनी: इस आंदोलन से होने वाली किसी भी शैक्षणिक या प्रशासनिक अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब उनके सब्र का बांध टूट रहा है। इस बार संघ आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है।




